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शृंगार शतक

शृंगार शतक

Shringar Shatak

by भर्तृहरि / अनुवादक: हरिदास वैद्य

Source: Shringar Shatak - Haridas Vaidya · हरिदास एण्ड कम्पनी, कलकत्ता / Digital Library of India (origin)

Devanagarihipublished544 pages

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( ख )

से प्रायः सभीमें यही लिखा रहता था—“हमें आपके अनुवाद किये हुए ‘वैराग्यशतक’ और ‘नीतिशतक’ खूब पसन्द आये । अब इसी ढंगसे आप ‘शृङ्गारशतक’ का भी अनुवाद कीजिये ।” कृद्दान और सहृदय सज्जनोंके बारम्बार ऐसा लिखने से मेरा उत्साह बढ़ा और मैंने, असमर्थ और अयोग्य होने पर भी, ‘शृङ्गारशतक’ का भी अनुवाद करके छपा डाला है । यह कह देनेमें हर्ज नहीं कि, मैं अपनी सभी पुस्तकें द्वितीय और तृतीय श्रेणीके सज्जनों के लिए लिखा करता हूँ ; क्योंकि मैं भी उन्हीं श्रेणियोंमें हूँ । लाख-लाख धन्यवाद हैं, परम करुणामय जगदीशको, जिनकी प्रेरणा और कृपासे उक्त श्रेणियोंके सज्जन मेरी लिखी पुस्तकोंको अत्यधिक श्रद्धा और चाव से पढ़ते हैं । यही वजह है कि, बिना किसी प्रकारको विज्ञापन-बाज़ीके, मेरी लिखी पुस्तकोंके संस्करण-पर-संस्करण होते हैं । ऐसा होते देखकर किस लेखकको प्रसन्नता न होती होगी ?

‘नीति-शतक’ और ‘वैराग्यशतक’में, मैंने महाराजा भर्तृहरि की संक्षिप्त जीवनी लगा दी है । प्रत्येक शतकमें ही, उसी जीवनी का होना बहुतसे सज्जन पसन्द नहीं करते ; इसीसे मैंने इस ‘शृङ्गारशतक’में महाराज की जीवनी नहीं दी है । जिन्हें महाराजा की जीवनी पढ़नी हो, वे ‘नीतिशतक’ और ‘वैराग्यशतक’में उसे पढ़ लें । उन शतकोंमें, भर्तृहरि महाराजका सारा वृत्तान्त चित्रों-सहित छापा गम्य है और उसे सर्वसाधारण और अनेक विद्वानोंने पसन्द करके, उसकी प्रशंसा भी मुक्तकण्ठसे की है ।