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शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

शुक्र नीति (महर्षि शुक्राचार्य - हिन्दी टीका सहित)

Shukra Niti of Shukracharya Hindi

by महर्षि शुक्राचार्य

Source: Shukra Niti with Vidyodini Sanskrit-Hindi Commentary (origin)

DevanagariHindipublished526 pages

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१४८ | शुक्रनीतिः

चाहिये। क्योंकि बहुत शास्त्रों को जिसने अच्छी तरह से देखा है वही महान् लौकिक व्यवहार का ज्ञाता हो सकता है अतः बुद्धिमान् मनुष्य आलस्य-रहित होकर बहुत से शास्त्रों का नित्य अभ्यास करे।

तदर्थं तु गृहीत्वापि तदधीना न जायते ॥ १३६ ॥
वेश्या तथाविधा वापि वशीकर्तुं नरं क्षमा ।
नेयात् कस्य वशं तद्वत् स्वाधीनं कारयेज्जगत् ॥ १३७ ॥

**वेश्यादर्शन के फल—**जैसे वेश्या किसी मनुष्य के धन को ग्रहण करके भी उसके अधीन नहीं हो जाती है और स्वयं अधीन न होते हुये भी उस मनुष्य को अपने वश में करने के लिये समर्थ होती है किन्तु स्वयं किसी के वश में नहीं होती है, वैसे ही जगत् के लोगों को अपने अधीन बनाये किन्तु स्वयं किसी के अधीन न हो। इसे वेश्या-दर्शन का फल समझना चाहिये।

श्रुतिस्मृतिपुराणानामर्थविज्ञानमेव च ।
सहवासात्पण्डितानां बुद्धिः पण्ढा प्रजायते ॥ १३८ ॥

**पण्डितों के साथ मैत्री के फल—**पण्डितों के साथ संगति करने से श्रुति, स्मृति तथा पुराणों के अर्थों का विशेष ज्ञान तथा सत्-असत् का विचार करनेवाली पण्ढा बुद्धि होती है। यह विद्वन्मैत्री का फल है।

देवपित्रतिथिभ्योऽन्नमदत्त्वा नाश्नीयात् क्वचित् ।
आत्मार्थं यः पचेन्मोहान्नरकार्थं स जीवति ॥ १३९ ॥

**अपने लिये केवल भोजन बनाकर खाने का निषेध—**देवता, पितृगण तथा अतिथियों को बिना दिये कभी भोजन नहीं करना चाहिये, क्योंकि जो मोहवश केवल अपने लिये भोजन बनाता है और देवादि को बिना दिये भोजन करता है उसका जीवन नरक के लिये होता है।

मार्गं गुरुभ्यो बलिने व्याधिताय शवाय च ।
राज्ञे श्रेष्ठाय व्रतिने यानगाय समुत्सृजेत् ॥ १४० ॥

**गुरुजनादि के लिये मार्ग देने का निर्देश—**गुरुजन, बलवान्, रोगी, शव (मुर्दा ले जाने के लिये), राजा, माननीय व्यक्ति, व्रतधारी, वाहन (सवारी) पर चढ़े हुए, ऐसे लोगों को जाने के लिये स्वयं हटकर मार्ग दे देना चाहिये।

शकटात्पञ्चहस्तं तु दशहस्तं तु वाजिनः ।
दूरतः शतहस्तं च तिष्ठेन्नागाद् वृषाद्दश ॥ १४१ ॥

**शकटादिकों से दूर रहकर चलने का निर्देश—**बैलगाड़ी आदि से ५ हाथ, घोड़े से १० हाथ, हाथी से १०० हाथ, बैल से १० हाथ की दूरी पर रहना चाहिये।