शुकसप्तति : एक आलोचनात्मक अध्ययन
Shuksaptati: Ek Alochanatmak Adhyayan
by श्रीमती हिमांशु द्विवेदी
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Read in context(8) भारतीय कथा-साहित्य की विशेषतायें :
कथा साहित्य की निम्नतः विशेषताये हैं :-
1 कथानको मे नाटकों और काव्यों की भांति पौराणिक या ऐतिहासिक, पात्रों का प्रयोग नहीं होता है बल्कि शुद्ध काल्पनिक जगत का चित्रण मिलता है। यह कथन प्रारम्भिक कथाओं मे तो सत्य प्रतीत होता है, कालान्तर में कुछ ऐतिहासिक कथायें भी लिखी गई।
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जीव-जन्तु और पशु-पक्षी भी मानव की बोली-बोलते हैं, अभिनय करते हैं, रोचक ढंग से मानवों को उपदेश देते हैं, उनके साथ सम्पर्क स्थापित करते हैं एवं उनकी सहायता करते हैं तथा स्वयं भी उनसे सहायता की अपेक्षा रखते हैं।
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निवेदन की मंजूषा विधि का प्रयोग ब्राह्मण-काल से विस्तार को प्राप्त कर पुराण काल तक पूर्ण परिपक्व अवस्था को प्राप्त होता है।
4 कथा साहित्य का एक विशेष प्रकार नीति कथायें भी हैं। "कथाच्छलेन बालानां नीतिस्तदिह कथ्यते" अर्थात ये बालोपयोगी हैं और कथाओं के माध्यम से इनमें नीति के रहस्यो की शिक्षा दी जाती है।
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इसमें मानव पात्र न होकर जीव-जन्तु या पशु-पक्षी पात्र होते हैं।
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ये मुख्यतया नीतिशास्त्र और अर्थशास्त्र से सम्बद्ध हैं।
7 इनमें जीवन का व्यवहारिक पक्ष वर्णित होता है। दैनिक जीवन, दैनिक व्यवहार, व्यक्ति और समाज का सम्पर्क कर्तव्याकर्तव्य का उपदेश आदि वर्णित होता है।
8 इनमें नीति एवं धर्म की शिक्षा दी जाती है, अतः धर्मशास्त्र से भी इनका सम्बन्ध है।
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