भारतकोश
श्वेताश्वतरोपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

श्वेताश्वतरोपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

Shvetashvatara Upanishad with Shankara Bhashya

आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished276 पृष्ठ

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( ११ ) ५२. कर्तृत्वादि धर्मोंसे युक्त जीवात्माके स्वरूपका वर्णन ... २१० ५३. जीवको कर्मोंके अनुसार विविध देहकी प्राप्तिका निर्देश ... २१४ ५४. परमात्मतत्त्वके जाननेसे जीवकी मुक्तिका कथन ... ... २१६ षष्ठ अध्याय ५५. परमेश्वरकी महिमासे सृष्टिचक्रका सञ्चालन ... ... २१९ ५६. चिन्तनीय परमेश्वरका स्वरूप तथा उसकी महिमा ... २२० ५७. भगवदर्पण कर्मसे भगवत्प्राप्ति ... ... २२२ ५८. उपासनासे भगवत्प्राप्ति ... ... २२४ ५९. ज्ञानसे भगवत्प्राप्ति ... ... २२६ ६०. ज्ञानियोंके तत्त्वानुभवका उल्लेख ... ... २२७ ६१. परमेश्वरकी महत्ता ... ... २२८ ६२. ब्रह्मसायुज्यके लिये परमेश्वरसे प्रार्थना ... ... २३० ६३. परमेश्वरके स्वरूपका निर्देश ... ... २३० ६४. परमात्मज्ञानसे नित्यसुखकी प्राप्ति और मोक्ष ... ... २३२ ६५. ब्रह्मके प्रकाशसे ही सबको प्रकाशकी प्राप्ति ... ... २३४ ६६. मोक्षके लिये ज्ञानके सिवा अन्य हेतुओंका निषेध ... ... २३६ ६७. परमेश्वरके स्वरूपका विशेषरूपसे वर्णन ... ... २३७ ६८. मुमुक्षुके लिये भगवच्छरणागतिका उपदेश ... ... २३९ ६९. परमात्मज्ञानके बिना दुःख-निवृत्तिकी असम्भवता ... २४२ ७०. श्वेताश्वतर-विद्याका सम्प्रदाय तथा इसके अधिकारी ... २४४ ७१. अनधिकारीके प्रति विद्योपदेशका निषेध ... ... २४७ ७२. परमेश्वर और गुरुमें श्रद्धा-भक्ति रखनेवाले शिष्यके प्रति किये गये उपदेशकी सफलता ... ... २४९