श्रीभाष्य (भगवद् रामानुजाचार्य - विशिष्टाद्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य सटीक)
Sri Bhashya of Bhagavad Ramanujacharya with Commentary
भगवद् रामानुजाचार्य (सम्पादक: स्वामी वासुदेवाचार्य) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( १४८ ) अन्य पदार्थ के मिथ्यात्व का ज्ञान बतला रहे हो, क्या वह ब्रह्म से यथार्थ ज्ञान का विरोधी है ? अथवा जगत सत्यता रूप अज्ञान का विरोधी है ? इस विषय पर विवेचन करना होगा । ब्रह्म के यथार्थ ज्ञान का विरोधी तो हो नही सकता, क्यों कि—अज्ञान का ब्रह्मविषयक होना संभव नही है। ज्ञान और अज्ञान एकविषयक होते भी नहीं। प्रपंचमय जगत की मिथ्यात्व की प्रतीति, उसकी सत्यस्वरूपा प्रतीति से स्वयं ही विरुद्ध है। इससे प्रपंचमय की सत्यता रूप प्रतीति का बाध हो जाता है, जगत की सत्यता की प्रतीति का बाध ब्रह्म के स्वरूप का बाध है, अद्वैत ब्रह्म में द्वैतभाव भावना ही तो ब्रह्म के स्वरूप से संबंधी अज्ञान है, इस प्रकार जगत की सत्यता की प्रतीति के बाध का तात्पर्य है ब्रह्म जगत के अद्वैत स्वरूप का बाध, ऐसे बाध को स्वीकारने का तात्पर्य है कि ब्रह्म में अज्ञान की स्वीकृति । अद्वैत ब्रह्म में जो द्वैतभाव है, वह ब्रह्म से भिन्न किसी वस्तु के मिथ्यात्व मानने से ही निवृत्त हो सकता है, ब्रह्म संबंधी वस्तु के मिथ्यात्व की स्वीकृति तो द्वैतभाव की ही स्वीकृति है। ब्रह्म का स्वरूप ही केवल स्वानुभव सिद्ध है, ऐसा नही कहा जा सकता । ब्रह्म से अभिन्न जगत का स्वरूप भी स्वानुभव सिद्ध है। ऐसा मानने से, ब्रह्म के अद्वैत ज्ञान के विरोधी द्वैतरूपी अज्ञान और उस अज्ञान के बाध का प्रश्न ही नही रह जाता । यदि कहें कि—द्वैतभाव ब्रह्म का धर्म है, सो कहना तो आपके इस कथन “अनुभव स्वरूप ब्रह्म अनुभव्य नहीं हो सकता" के सर्वथा विपरीत होगा । इसलिए अज्ञान का विरोधी ब्रह्म कभी अज्ञान का आश्रय नहीं हो सकता । तिरोधान किं च अविद्यया प्रकाशैकस्वरूपं ब्रह्म तिरोहितमिति वदता, स्वरूपनाश एवोक्तः स्यात्, प्रकाश तिरोधानं नाम, प्रकाशोत्पत्ति प्रतिबन्धो विद्यमानस्य विनाशो वा । प्रकाशस्यानुत्पाद्यत्वाभ्युपगमेन प्रकाश तिरोधानं प्रकाश नाश एव । प्रकाशैक स्वरूप ब्रह्म को अविद्या से तिरोहित कहना, ब्रह्म का स्वरूप नाश ही मानना है। प्रकाशोत्पत्ति का प्रतिबन्ध ही प्रकाश का तिरोधान है, अथवा उसके अस्तित्व का विनाश है। प्रकाश की अनुत्पा- द्यता तो हो नहीं सकती, इसलिए प्रकाश के तिरोधान का तात्पर्य, प्रकाश नाश ही कहना होगा । ankurnagpal108@gmail.com