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श्रीभाष्य (भगवद् रामानुजाचार्य - विशिष्टाद्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य सटीक)

श्रीभाष्य (भगवद् रामानुजाचार्य - विशिष्टाद्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य सटीक)

Sri Bhashya of Bhagavad Ramanujacharya with Commentary

by भगवद् रामानुजाचार्य (सम्पादक: स्वामी वासुदेवाचार्य)

DevanagariHindipublished696 pages

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३० आदि शास्त्रों के साथ पांचरात्र शास्त्र का अविरोध ज्ञापन। उक्त शास्त्र की स्वाभिमत स्वीकृति । —पृ० ८०८-१६, (तृतीय पाद) १. वियदधिकरण [सूत्र १-६] १. पूर्वपक्ष-आकाश की अनुत्पत्ति का संशय । २. (सिद्धान्त)-आकाश की उत्पत्ति का समर्थन तथा आकाशोत्पत्ति बोधक श्रुति की गौणार्थता के संशय का निराकरण । ३. पूर्वपक्ष-ब्रह्म शब्द की तरह “संभूत” शब्द के गौण मुख्य दोनों ही अर्थों का समर्थन । ४. (सिद्धान्त)-एक विज्ञान से समस्त विज्ञान की प्रतिज्ञा के आधार पर आकाशोत्पत्ति के सिद्धान्त का श्रौत शब्दों से ही समर्थन । जन्य पदार्थ मात्र की ब्रह्म कार्यता का समर्थन । आकाशोत्पत्ति से वायु की उत्पत्ति का वर्णन तथा सद्ब्रह्म की अनुपपत्ति का निरूपण । —पृ० ८११-२६, २. तेजोधिकरण (सूत्र १०-१७) १. पूर्वपक्ष-शुद्ध वायु से तेजोत्पत्ति की शंका, तेज से जलोत्पत्ति की शंका, जल से पृथिवी उत्पत्ति की शंका श्रौत “अन्न” शब्द के पृथिवी परक अर्थ का हेतु प्रदर्शन । १. (सिद्धान्त)-आकाशादि शरीरधारी ब्रह्म से वायु आदि की उत्पत्ति का समर्थन, ब्रह्म से साक्षात् आकाश आदि की उत्पत्ति का प्रतिपादन । इन्द्रिय और मन की उत्पत्ति के आधार पर ब्रह्म की साक्षात् कारणता का समर्थन । स्थावर जंगम सभी पदार्थों की ब्रह्म शब्द की मुख्यार्थता प्रदर्शन । —पृ० ८२६-३२, ३. आत्माधिकरण (सूत्र १८) १. पूर्वपक्ष-आकाश आदि की तरह जीवोत्पत्ति की शंका