श्रीभाष्य (भगवद् रामानुजाचार्य - विशिष्टाद्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य सटीक)
Sri Bhashya of Bhagavad Ramanujacharya with Commentary
भगवद् रामानुजाचार्य (सम्पादक: स्वामी वासुदेवाचार्य) द्वारा
पृष्ठ 47, कुल 696 में से
संदर्भ में पढ़ें३५ ४. (सिद्धान्त)—वैदिक “चरण” शब्द के आधार पर अवशिष्ट कर्मानुसार ही जन्म का समर्थन । ५. पूर्वपक्ष—स्मृतिशास्त्र विहित आचार की व्यर्थता ज्ञापन । ६. (सिद्धान्त)—स्मृति शास्त्रोक्त आचार की कारणता का प्रतिपादन बादरि आचार्य के मतानुसार “चरण” शब्द की पुण्य पापार्थता का निरूपण । —पृ० ६०६-११, ३. अनिष्टादिकार्याधिकरण (सूत्र १२-२१) १. यागादिकर्म विहीन पापी जीवों की भी चान्द्रमसी गति की संभावना का निरूपण । प्रथम यमालय में पापफल का भोग बाद में चान्द्रमसी गति की संभावना प्रदर्शन । २. सात प्रकार के प्रधान नरकों का ज्ञापन । नरक में यम की प्रधानता वर्णन । कर्मी और कर्मांग विद्या संपन्न व्यक्तियों की चान्द्रमसी गति का निरूपण । पापपुण्य रहित अज्ञ जीवों की दंशमशकादि गति का वर्णन । स्वेदज में उद्भिज का अन्तर्भाव । —पृ० ६११-१६, ४. तत्स्वाभाव्यापत्ति अधिकरण (सूत्र २२) चन्द्रमंडल से लौटते समय कर्मयोगियों की आका- शादि स्वभाव प्राप्ति का निरूपण । —पृ० ६१६-१७, ५. नातिचिराधिकरण (सूत्र २३) आकाश आदि स्वभाव के परित्याग की त्वरा का विवेचन । —पृ० ६१७-१८, ६. अन्याधिष्ठिताधिकरण (सूत्र २४-२७) अन्य जीवों से अधिष्ठत जीव का शस्य प्रवेश वर्णन । यज्ञीय हिंसा में निष्पापता का प्रतिपादन । जीव का शस्य से, रेत सेचनक्षम शरीर में प्रवेश वर्णन । स्त्री देह में रेत सिंचन द्वारा जीव का गर्भ प्रवेश तथा योनि द्वारा जन्म वर्णन । —पृ० ६१८-२१, ankurnagpal108@gmail.com