सुभाषितरत्नभाण्डागार (पण्डित काशीनाथ शर्मा संग्रह)

सुभाषितरत्नभाण्डागार (पण्डित काशीनाथ शर्मा संग्रह)
Subhashita Ratna Bhandagara
पण्डित काशीनाथ शर्मा (सम्पादक: नारायण राम आचार्य) द्वारा
स्रोत: Subhashita Ratna Bhandagara (10,000+ Classic Sanskrit Epigrams & Maxims - Nirnaya Sagar Press) (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished516 पृष्ठ
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विषयानुक्रमकोशः ५
| विषया | पृष्ठे | श्लोका | विषया | पृष्ठे | श्लोका | विषया | पृष्ठे | श्लोकाः |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| दीप .. | २४७ | ६२-६७ | शरः | २४८ | ७५ | नन्दनवनम् | २४८ | ८१ |
| तुला | २४७ | ६८-६९ | लम्पार्क | २४८ | ७६ | वसन्त | २४८ | ८२ |
| कुम्भ | २४८ | ७०-७१ | खल | २४८ | ७७ | मुसल | २४८ | ८३ |
| कलशः . | २४८ | ७२ | कण्टक | २४८ | ७८ | सकीर्णा | २४८ | ८४-१०४ |
| दुग्धम् | २४८ | ७३ | कालकूटम् | २४८ | ७९ | |||
| बडिशदण्ड .. | २४८ | ७४ | जिह्वा | २४८ | ८० |
६. नवरसप्रकरणम्
| विषया | पृष्ठे | श्लोका | विषया | पृष्ठे | श्लोका | विषया | पृष्ठे | श्लोकाः |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| शृङ्गाररसनिर्देशः | २५० | वलित्रयम् | २६७ | ३२८-३३८ | मयूरविषयकोक्ति | २८३ | १६६ | |
| मनसिजप्रशंसा | २५० | १-२२ | रोमावली | २६७ | ३३९-३६९ | मुक्ताकलाप प्रत्युक्ति | २८३ | १६७ |
| स्त्रीप्रशंसा | २५० | १-६१ | पृष्ठभाग | २६८ | ३७० | वियोगिन्या विप्रलापा | २८३ | २-४९ |
| युववर्णनम् | २५२ | १-९ | नितम्ब | २६८ | ३७१-३७९ | मदन प्रत्युक्तय | २८५ | ४३-४५ |
| बालात्ववर्णनम् | २५३ | १-४८ | (काञ्ची) | २६८ | ३८०-३८१ | चन्द्रं प्रत्युक्तय | २८५ | ४६-४८ |
| वयःसंधिवर्णनम् | २५४ | १-६० | जघनम् | २६८ | ३८२-३८५ | रोहिणी प्रत्युक्ति | २८५ | ४९ |
| तरुणीपृथगवयववर्णनं | २५७ | १-४३२ | मदनमन्दिरम् | २६८ | ३८६-३८७ | नायिका प्रति सखी-वचनम् | २८५ | १-३३ |
| केशपाश | २५७ | १-२६ | ऊरु | २६८ | ३८८-३९८ | दूती प्रति स्वावस्था-कथनम् | २८७ | १-१० |
| (अभ्यङ्गारम्भ ) | २५७ | २७-२९ | जङ्घे | २६९ | ३९९-४०२ | नायक प्रति दूतीप्रेषणम् | १-९ | |
| (सीमन्तरचनम्) | २५८ | ३०-३७ | चरणौ | २६९ | ४०३-४१६ | नायकस्याग्रे दूत्युक्तय | २८७ | १-९७ |
| (सीमन्तसिन्दूरम्) | २५८ | ३८-३९ | गुल्फौ | २६९ | ४१७ | नायकं प्रति नायिका-संदेश | २९१ | १-४ |
| ललाट | २५८ | ४० | पादाङ्गुल्य | २६९ | ४१८ | नायिका प्रति संदेश-प्रेपणम् | २९१ | १ |
| (तिलकः) | २५८ | ४१-५१ | नाखाः | २६९ | ४१९-४२१ | नायिका प्रति नायक-संदेश | २९१ | १-३६ |
| भ्रुवौ | २५८ | ५२-५९ | (गमनम्) | २६९ | ४२२-४२५ | दूतीं प्रति नायिका-प्रश्ना | २९२ | १-३ |
| नेत्रे | २५९ | ६०-९६ | (जृम्भा) | २६९ | ४२६-४२७ | दूत्युपहासप्रश्ना | २९३ | १-१२ |
| (कटाक्ष ) | २६० | ९७-११२ | (निद्रा) | २७० | ४२८-४३० | नायिका प्रति नायका-वस्थाकथनम् | २९३ | १-५ |
| (अश्रूणि ) | २६० | ११३ | (कान्ति ) | २७० | ४३१-४३२ | सूर्यास्तमनसमयवर्ण-नम् | २९३ | १-७३ |
| नासा | २६० | ११४-११७ | समग्रस्त्रीस्वरूपवर्णनम् | २७० | १-७७ | चक्रवाकावस्थाख्यानम् | २९६ | १-१३ |
| (नासाभूषणम् ) | २६० | ११८-१२२ | परस्परदर्शनम् | २७३ | १-२ | संध्यावर्णनम् | २९६ | १-६ |
| कर्णौ | २६० | १२३-१३० | नायकदर्शनम् | २७३ | १-६ | रजनिवर्णनम् | २९६ | १-६ |
| (कर्णभूषणम्) | २६१ | १३१-१३३ | नायिकादर्शनम् | २७३ | १-३४ | तमोवर्णनम् | २९६ | १-४० |
| कपोलौ | २६१ | १३४-१३६ | विरह | २७४ | १ | अभिसारिकासंचार-कथनम् | २९८ | १-२३ |
| अधर | २६१ | १३७-१५४ | वियोगिनोऽवस्था-वर्णनम् | २७४ | १-९ | नक्षत्रोदयवर्णनम् | २९९ | १-२ |
| दन्ता | २६१ | १५५-१५८ | वियोगिन्या अवस्था-वर्णनम् | २७५ | १-६५ | चन्द्रोदयवर्णनम् | २९९ | १-१६४ |
| चिबुकः | २६१ | १५९ | वियोगिनो विप्रलापा | २७७ | १-१६७ | चन्द्रकलावर्णनम् | ३०३ | १२३ |
| मुखम् | २६२ | १६०-२०६ | मदनं प्रत्युक्तय | २८२ | १२३-१४३ | ज्योत्स्नावर्णनम् | ३०३ | १२४-१३८ |
| (स्मितम्) | २६३ | २०७-११० | चन्द्रं प्रत्युक्तय | २८२ | १४४-१४८ | सकलद्विचन्द्रवर्णनम् | ३०३ | १३९-१६४ |
| कण्ठ | २६३ | २११-२१७ | पवनं प्रत्युक्तय | २८३ | १४९-१५० | नायकागमनावस्था-वर्णनम् | ३०४ | १-६ |
| (वाणी) | २६३ | २१८-२२३ | मेघं प्रत्युक्तय | २८३ | १५१-१५३ | |||
| बाहू | २६४ | २२४-२२९ | अशोकं प्रत्युक्ति | २८३ | १५४-१५५ | |||
| करौ | २६४ | २३०-२३५ | तमालं प्रत्युक्ति | २८३ | १५६ | |||
| (कङ्कणम्) | २६४ | २३६-२४२ | मृणालाहारं प्रत्युक्ति | २८३ | १५७ | |||
| (हस्तरङ्गा) | २६४ | २४३ | मधुकरं प्रत्युक्तय | २८३ | १५८-१६१ | |||
| अङ्गुष्ट्य | २६४ | २४४-२४५ | हंसं प्रत्युक्ति | २८३ | १६२ | |||
| (मुद्रिका) | २६४ | २४६ | चकोरं प्रत्युक्ति | २८३ | १६३ | |||
| स्तनौ | २६४ | २४७-२९८ | कृष्णसारं प्रत्युक्ति | २८३ | १६४ | |||
| कञ्चुकी | २६६ | २९९ | सारङ्गं प्रत्युक्ति | २८३ | १६५ | |||
| (हारः) | २६६ | ३००-३११ | ||||||
| मध्यदेश | २६६ | ३१२-३२३ | ||||||
| नाभि | २६७ | ३२४-३२७ |