सुभाषितरत्नभाण्डागार (पण्डित काशीनाथ शर्मा संग्रह)

सुभाषितरत्नभाण्डागार (पण्डित काशीनाथ शर्मा संग्रह)
Subhashita Ratna Bhandagara
पण्डित काशीनाथ शर्मा (सम्पादक: नारायण राम आचार्य) द्वारा
स्रोत: Subhashita Ratna Bhandagara (10,000+ Classic Sanskrit Epigrams & Maxims - Nirnaya Sagar Press) (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished516 पृष्ठ
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सुभाषितरत्नभाण्डागारस्य
| विषया | पृष्ठे | श्लोका | विषया | पृष्ठे | श्लोका | विषया | पृष्ठे | श्लोका |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| नायकागमने नायिका प्रति सखीवचनम् | ३०४ | १-४ | नायकं प्रति नायिकोक्तय | ३३० | १-८ | कन्दुकक्रीडा | ३४६ | ३४-४३ |
| नायकातिथ्यवर्णनम् | ३०५ | १-४ | नाथिक प्रति सखीवाक्यम् | ३३० | १-४ | हेमन्तवायव | ३४७ | ४४-४ |
| नायकस्य नायिका प्रति प्रश्न | ३०५ | १-३ | ससाय प्रति नायकोक्ति | ३३० | १ | हेमन्तपथिक | ३४७ | ४५-५२ |
| प्रणयकलहे नायिकानुनय | ३०५ | १-७० | नाथिका प्रति सखीवाक्यम् | ३३० | १ | शिशिरवर्णनम् | ३४७ | १-२२ |
| सख्यनुनय | ३०७ | १-२३ | देशान्तरोपगतो नायक | ३३० | १-३ | शिशिरसमयस्वभावाख्यानम् | ३४७ | २-१५ |
| कलहान्तरिताप्रलापाख्यानम् | ३०८ | १-१६ | वसन्तवर्णनम् | ३३० | १-१८४ | हज्जोलनक्रीडा | ३४८ | १६-६७ |
| नायिकानुनय | ३०९ | १-४ | वसन्तसमयस्वभावाख्यानम् | ३३१ | ४-१०१ | शिशिरवायव | ३४८ | १८-१९ |
| नायकयोरुक्तिप्रत्युक्तय | ३०९ | १-१२ | मदनपूजा | ३३३ | १०२ | शिशिरपथिक | ३४८ | २०-२२ |
| नायिकाशिक्षा | ३१० | १-८ | कुसुमावचय | ३३४ | १०३-११९ | स्त्रीस्वभावानिन्दा | ३४८ | १-८३ |
| नायिकाप्रसाद | ३१० | १-५ | वसन्तवायव | ३३४ | १२०-१३७ | सतीवर्णनम् | ३५० | १-४१ |
| परस्परप्रसाद | ३१० | १-३२ | वसन्तपथिका | ३३५ | १३८-१८४ | असतीचरितम् | ३५१ | १-६३ |
| प्रियचाटूक्तय | ३१२ | १-७९ | ग्रीष्मववर्णनम् | ३३५ | १-१३० | पान्थसकेत | ३५४ | ६७-८८ |
| पानगोष्ठीवर्णनम् | ३१४ | १-६७ | ग्रीष्मगमयस्वभावाख्यानम् | ३३५ | ३-३२ | वेश्यागर्हणम् | ३५५ | १-५१ |
| द्यूतक्रीडावर्णनम् | ३१६ | १-६ | मध्याह्न | ३३६ | ३३-५८ | अष्टनायिका | ३५५ | १-१०३ |
| बाह्यरतक्रीडावर्णनम् | ३१६ | १-२८ | जलकेलिः | ३३७ | ५९-११६ | स्वाधीनपतिका | ३५५ | १-९ |
| आलिङ्गनम् | ३१६ | १-११ | प्रपापालिका | ३३९ | ११७-१२३ | खण्डिता | ३५५ | १०-२१ |
| चुम्बनम् | ३१६ | १२-१६ | ग्रीष्मवायव | ३३९ | १२४-१२६ | अभिसारिका | ३५६ | २२-४० |
| विहार | ३१७ | १७-२८ | ग्रीष्मपथिका | ३३९ | १२७-१३० | कलहान्तरिता | ३५७ | ४१-६८ |
| सुरतप्रशंसा | ३१७ | १-९ | वर्षावर्णनम् | ३४० | १-१११ | विप्रलब्धा | ३५८ | ६९-७९ |
| नववधूसंगमे सखीवाक्यम् | ३१७ | १-४ | वर्षासमयस्वभावाख्यानम् | ३४० | ५-७२ | प्रोषितभर्तृका | ३५५ | ८०-८७ |
| नववधूसंगम | ३१७ | १-१९ | दोलाकेलि | ३४२ | ७३-७७ | वासकसज्जा | ३५९ | ८८-९६ |
| सुरतकेलिकथनम् | ३१८ | १-५१ | वर्षावायव | ३४२ | ७८-८० | उत्का | ३५९ | ९७-१०३ |
| विपरीतरतकिया | ३२० | १-२१ | वर्षापथिका | ३४२ | ८१-९६ | वीररसनिर्देशः | ३६० | १-५१ |
| सुरतनिवृत्ति | ३२१ | १-३४ | वर्षापथिककामिनी | ३४३ | ९७-१०९ | करुणरसनिर्देशः | ३६१ | १-४१ |
| चन्द्रास्तसमयवर्णनम् | ३२२ | १-१४ | खद्योत | ३४३ | ११० | अद्भुतरसनिर्देशः | ३६३ | १-२३ |
| मध्यरात्रक्रीडावर्णनम् | ३२३ | १-५ | हंस | ३४४ | १११ | हास्यरसनिर्देशः | ३६३ | १-५६ |
| प्रभातवर्णनम् | ३२३ | १-६८ | शरद्वर्णनम् | ३४४ | १-५८ | भयानकरसनिर्देशः | ३६४ | १-१४ |
| प्रभातवायुवर्णनम् | ३२५ | १-४१ | शरत्समयस्वभावाख्यानम् | ३४४ | ४-४७ | बीभत्सरसनिर्देशः | ३६६ | १-२ |
| सूर्योदयवर्णनम् | ३२७ | १-२५ | भ्रमरक्रीडा | ३४५ | ४८-५४ | रौद्ररसनिर्देशः | ३६६ | १-५६ |
| नायिकानिर्गमनम् | ३२८ | १-६ | शरद्वायव | ३४५ | ५५-५६ | शान्तरसनिर्देशः | ३६७ | १-२६० |
| सभोगाविष्करणम् | ३२८ | १-२३ | शरत्पथिक | ३४५ | ५७-५८ | वैराग्यम् | ३६७ | १-११४ |
| प्रियप्रस्थानावस्थाकथनम् | ३२९ | १-२४ | हेमन्तवर्णनम् | ३४५ | १-५२ | विषयोपहाम | ३७१ | ११५-१३७ |
| सखीं प्रति नायिकावाक्यम् | ३३० | १-२ | हेमन्तसमयस्वभावाख्यानम् | ३४५ | ४-३३ | गर्भवासप्रयुक्तं दुःखम् | ३७२ | १३८-१४३ |
| अनित्यता निरूपणम् | ३७२ | १४४-१८८ | ||||||
| कालाचरितम् | ३७३ | १८९-२०४ | ||||||
| पश्चात्ताप | ३७४ | २०५-२३० | ||||||
| विचार | ३७५ | २३१-२६३ |
७. संकीर्णप्रकरणम्
संकीर्णश्लोका ३७७ | १-७०६