भारतकोश
सुखमनी साहिब (श्री गुरु अर्जुन देव जी - सम्पूर्ण २४ अष्टपदी सटीक)

सुखमनी साहिब (श्री गुरु अर्जुन देव जी - सम्पूर्ण २४ अष्टपदी सटीक)

Sukhmani Sahib with Complete 24 Ashtapadis Commentary

श्री गुरु अर्जुन देव जी (पञ्चम पातशाह) द्वारा

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23 देनहारु प्रभ छोडि कै लागहि आन सुआइ ॥ नानक कहू न सीझई बिनु नावै पति जाइ ॥१॥ असटपदी ॥ दस बसतू ले पाछै पावै ॥ इेक बसतु कारनि बिखोटि गवावै ॥ इेक भी न देइि दस भी हिरि लेइि ॥ तउ मूड़ा कहु कहा करेइि ॥ जिसु ठाकुर सिउ नाही चारा ॥ ता कउ कीजै सद नमसकारा ॥ जा कै मनि लागा प्रभु मीठा ॥ सरब सूख ताहू मनि वूठा ॥ जिसु जन अपना हुकमु मनाइिआ ॥ सरब थोक नानक तिनि पाइिआ ॥१॥ अगनत साहु अपनी दे रासि ॥