भारतकोश
सुखमनी साहिब (श्री गुरु अर्जुन देव जी - सम्पूर्ण २४ अष्टपदी सटीक)

सुखमनी साहिब (श्री गुरु अर्जुन देव जी - सम्पूर्ण २४ अष्टपदी सटीक)

Sukhmani Sahib with Complete 24 Ashtapadis Commentary

श्री गुरु अर्जुन देव जी (पञ्चम पातशाह) द्वारा

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जैसा करे तैसा को थीआ ॥ अपना खेलु आपि करनैहारु ॥ दूसर कउनु कहै बीचारु ॥ जिस नो कृपा करै तिसु आपन नामु देइ ॥ बडभागी नानक जन सेइ ॥८॥१३॥ सलोकु ॥ तजहु सिआनप सुरि जनहु सिमरहु हरि हरि राइ ॥ इक आस हरि मनि रखहु नानक दूखु भरमु भउ जाइ ॥१॥ असटपदी ॥ मानुख की टेक बृथी सभ जानु ॥ देवन कउ इकै भगवानु ॥ जिस कै दीऐ रहै अघाइ ॥ बहुरि न तृसना लागै आइ ॥ मारै राखै इको आपि ॥