भारतकोश
सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)

सुन्दर विलास (सन्त सुन्दरदास जी - अद्वैत वेदान्त एवं ज्ञान-भक्ति काव्य सटीक)

Sundar Vilas of Sant Sundardas with Hindi Commentary

सन्त सुन्दरदास जी द्वारा

DevanagariHindipublished284 पृष्ठ

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स्वयं सुन्दरदास जी के इन भावविभोर उद्गारो के अनुसार उनकी बाल्यावस्था मे ही उनके परमगुरुदेव श्री स्वामी दादूदयालजी महाराज ने परमवात्सल्य के साथ उनको सुन्दर नाम देकर सुन्दरतम जीवन की जो दीक्षा दी थी उसीकी दिव्य छटा सुन्दरविलास के पद पद मे छलकती है । सुन्दरविलास का एक एक शब्द एक अज्ञात सौन्दर्यसागर मे डुबकी लगाने की प्रेरणा देता है । यह सुन्दरवाणी किसी तडफती मछली को किसी जल की, किमी चातक को किसी स्वाति वू द की, किसी चकोर को किसी चन्द्रमा की किसी सर्प को किसी चंदन तरु की दिशा दिखाने के लिए पर्याप्त है । सुन्दरविलास का यह प्रकाशन सुन्दरदास जी महाराज की ही पावन सेवा मे एक पुष्पार्पण है । इस सर्वसुन्दर ग्रन्थ के प्रकाशन मे हमारी असावधानी के कारण जो असुन्दरता आ गयी हो उसके लिए हम श्री सुन्दरदासजी महाराज से क्षमाप्रार्थी हैं । "सुन्दरदास पुकारि के कहत बजावे ढोल । चेति सके न चेति ले हरि बोलो हरि बोल ॥ सुन्दर देखा सोधि के सब काहू का ज्ञान । कोई मन माने नही विना निरंजन ध्यान ॥" ॥ हरि ओ३म् तत्सत् ॥ कार्यालय मन्त्री स्वामी लक्ष्मीराम श्रीदादू सत्‌साहित्य चिकित्सालय मण्डल जयपुर जयपुर