भारतकोश
स्वदेशी भारत एवं विदेशी कंपनियों का षड़यन्त्र

स्वदेशी भारत एवं विदेशी कंपनियों का षड़यन्त्र

Swadeshi Bharat evam Videshi Kampaniyon Ka Shadyantra

राजीव दीक्षित / रोबिन सिराना द्वारा

स्रोत: Swadeshi Bharat & Rajiv Dixit Lectures · Swadeshi Robin Sirana · 2017 (उद्गम)

DevanagariHindipublished77 पृष्ठ

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इसके इलावा राजीव भाई ने यूरोप और भारत की स्मृति संस्कृति और इनकी भिन्नताओं पर गहरा अध्ययन किया और लोगों को बताया कि कैसे भारतवासी यूरोप के लोगों की मजबूरी को अपना फैशन बना रहे हैं और कैसे उनकी नकल कर बीमारियों के शिकार हो रहे हैं ।। राजीव भाई का कहना था कि देश में आधुनिकीकरण के नाम पर पश्चिमीकरण हो रहा है । और इसका एक मात्र कारण देश में चल रहा अंग्रेज मैकॉले का बनाया हुआ Indian Education System है । क्योंकि आजाद भारत में सारे कानून अंग्रेजों के चल रहे हैं इसी लिए ये मैकॉले द्वारा बनाया गया शिक्षा तंत्र भी चल रहा है ।

राजीव भाई कहते थे कि इस अंग्रेज मैकॉले ने जब भारत का शिक्षा तंत्र का कानून बनाया और शिक्षा का पाठ्यक्रम तैयार किया तब इसने एक बात कही कि मैंने भारत का शिक्षा तंत्र ऐसा बना दिया है की इसमें पढ़ के निकलने वाला व्यक्ति शकल से तो भारतीय होगा पर अकल से पूरा अंग्रेज होगा हो उसकी आत्मा अंग्रेजों जैसी होगी उसको भारत की हर चीज में पिछड़ापन दिखाई देगा ।। और उसको अंग्रेज और अंग्रेजियत ही सबसे बढ़िया लगेगी ।।

इसके इलावा राजीव भाई का कहना था कि इसी अंग्रेज मैकॉले ने भारत की न्याय व्यवस्था को तोड़ कर IPC, CPC जैसे कानून बनाये और उसके बाद ब्यान दिया की मैंने भारत की न्याय पद्धति को ऐसा बना दिया है कि इसमें किसी गरीब को ईसाफ नहीं मिलेगा । सालों साल मुकदमे लटकते रहेंगे ।। मुकदमों के सिर्फ फैसले आएंगे न्याय नहीं मिलेगा ।। इस अंग्रेज शिक्षा पद्धति और अंग्रेजी न्यायव्यवस्था के खिलाफ लोगों को जागरूक करने के लिए राजीव भाई ने मैकॉले शिक्षा और भारत की प्राचीन गुरुकुल शिक्षा पर बहुत व्याख्यान दिये और इसके अतिरिक्त अपने एक मित्र आजादी बचाओ आंदोलन के कार्यकर्ता पवन गुप्ता जी के साथ मिल कर एक गुरुकुल की स्थापना की वहाँ वो फेल हुए बच्चों को ही दाखिल करते थे कुछ वर्ष उन बच्चों को उन्होंने प्राचीन शिक्षा पद्धति से पढ़ाया । और बच्चे बाद में इतने ज्ञानी हो गए की आधुनिक शिक्षा में पढ़े बड़े बड़े वैज्ञानिक उनके आगे दाँतों तले उंगली दबाते थे ।

राजीव जी ने रामराज्य की कल्पना को समझना चाहा । इसके लिए वे भारत अनेकों साधू संतों, रामकथा करने वालों से मिले और उनसे पूछते थे की भगवान श्री राम रामराज्य के बारे क्या कहा है ?? लेकिन कोई भी उत्तर उनको संतुष्ट नहीं कर पाया । फिर उन्होंने भारत में लिखी सभी प्रकार की रामायणों का अध्ययन किया और खुद ये हैरान हुए कि रामकथा में से भारत की सभी समस्याओं का समाधान निकलता है । फिर राजीव भाई घूम घूम कर खुद रामकथा करने लगे और उनकी रामकथा सभी संत और बाबाओं से अलग होती वो सिर्फ उसी बात पर अधिक चर्चा करते जिसे अन्य सत्य तो बताते नहीं या वो खुद ही ना जानते हैं । राजीव भाई लोगों को बताते कि किस प्रकार रामकथा में भारत की सभी समस्याओं का समाधान निकलता है । (इस बारे में अधिक जानकारी के लिए आप राजीव भाई की रामकथा वाला व्याख्यान सुन सकते हैं)

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