तैत्तिरीयोपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)
Taittiriya Upanishad with Shankara Bhashya
आदि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)
पृष्ठ 100, कुल 261 में से
संदर्भ में पढ़ेंब्रह्मानन्दवल्ली प्रथम अनुवाक ब्रह्मानन्दवल्लीका शान्तिपाठ अतीतविद्याप्राप्त्युपसर्गप्रश- | पूर्वकथित विद्याकी प्राप्तिके मनार्था शान्तिः पठिता । इदानीं | प्रतिबन्धोंकी शान्तिके लिये शान्ति-पाठ कर दिया गया । अब आगे तु वक्ष्यमाणब्रह्मविद्याप्राप्त्युप- | कही जानेवाली विद्याकी प्राप्तिके प्रतिबन्धोंकी शान्तिके लिये शान्ति- सर्गोपशमनार्था शान्तिः पठ्यते- | पाठ किया जाता है— ॐ सह नाववतु । सह नौ भुनक्तु । सहवीर्यं करवावहै । तेजस्वि नावधीतमस्तु मा विद्विषावहै ॥ ॐ शान्तिः ! शान्तिः !! शान्तिः !!! [ वह परमात्मा ] हम [ आचार्य और शिष्य ] दोनोंकी साथ-साथ रक्षा करे, हम दोनोंका साथ-साथ पालन करे, हम साथ-साथ वीर्यलाभ करें, हमारा अध्ययन किया हुआ तेजस्वी हो और हम परस्पर द्वेष न करें । तीनों प्रकारके प्रतिबन्धोंकी शान्ति हो ।
CC-0 Pt. Chakradhar Joshi and Sons, Dev Prayag. Digitized by eGangotri