वैयाकरण सिद्धान्त कौमुदी (भट्टोजि दीक्षित - बालमनोरमा व तत्त्वबोधिनी टीका सम्पूर्ण पूर्वार्ध)
Vaiyakarana Siddhanta Kaumudi of Bhattoji Dikshita with Commentary
भट्टोजि दीक्षित (टीकाकार: वासुदेव दीक्षित एवं ज्ञानेन्द्र सरस्वती) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ५२० ) सिद्धान्तकौमुद्याम्- त्वम्। ततष्टाप्॥ ध्यपूर्वस्य स्त्रीविषयस्य ॥ धकारयकारपूर्वो योऽन्योऽच् स उदात्तः॥ अन्तर्धा। स्त्रीविषयवर्णनाम्नामिति प्राप्ते। छाया। माया। जाया। यान्तस्यान्त्यात्पूर्वमित्याद्यु- दात्तत्वे प्राप्ते। स्त्रीति किम्? वाह्यम्। यञन्तत्वादाद्युदात्तत्वम्। विषयग्रहणं किम्? इम्या। क्षत्रिया। यतो नाव इत्याद्युदात्त इम्यशब्दः। क्षत्रियशब्दस्तु यान्तस्यान्त्यात्पूर्वमिति मध्यो- दात्तः॥ खान्तस्याश्मादेः॥ नखम्। उखा। सुखम्। दुःखम्। नखस्य स्वाङ्गशिटा- मित्याद्युदात्तत्वे प्राप्ते। उखा नाम भाण्डविशेषः। तस्य कृत्रिमत्वात्खय्युवर्णं कृत्रिमाख्या चेदित्युवर्णस्योदात्तत्वे प्राप्ते। सुखदुःखयोर्नब्बिषयस्येति प्राप्ते। अश्मादेः किम्? शिखा। मुखम्। मुखस्य स्वाङ्गशिटामिति नब्विषयस्येति वा