भारतकोश
वराह पुराण

वराह पुराण

Varaha Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished414 पृष्ठ

पृष्ठ 164, कुल 414 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 164

अध्याय ९३-९४] महिषासुरकी मन्त्रणा और देवासुर-संग्राम १५३


गन्धर्व, सिद्ध, यक्ष, किंनर और राक्षसोंकी स्त्रियोंमें भी कोई इतना सुन्दर नहीं है। विश्वकी अन्य स्त्रियोंमें भी कहीं ऐसा रूप नहीं दीखता।

फिर नारदजी सहसा उठे और वैष्णवीदेवीको प्रणामकर आकाश मार्गद्वारा समुद्रमें स्थित महिषासुरकी राजधानीमें पहुँच गये। उसने ब्रह्माजीके वरप्रसादसे सारी देव-सेनाको पराजित कर दिया था। महिषासुरने सभी लोकोंमें विचरण करनेवाले नारदमुनिको आये देखकर बड़ी श्रद्धा-भक्तिसे पूजा की।

नारदमुनिने उस असुरसे कहा—असुरेन्द्र ! सावधान होकर सुनो। विश्वमें रत्नके समान एक कन्या प्रकट हुई है। तुमने तो वरदानके प्रभावसे चर-अचर तीनों लोकोंको अपने वशमें कर लिया है। दैत्य! मैं ब्रह्मलोकसे मन्दराचलपर गया, वहाँ मैंने देवीकी वह पुरी देखी, जो सैकड़ों कन्याओंसे व्याप्त है। उनमें जो सबसे प्रधान है वैसी देवताओं, दैत्यों और यक्षोंके यहाँ भी कोई सुन्दरी कन्या नहीं दिखायी देती। कहाँतक कहूँ, मैंने उसकी जैसी सुन्दरता देखी है तथा उसमें जितना सतीत्वका प्रभाव है, ऐसी कन्या समस्त ब्रह्माण्डमें भी कभी कहीं नहीं देखी। देवता, गन्धर्व, ऋषि, सिद्ध, चारण तथा सब अन्य दैत्योंके अधिपति भी उसी कन्याकी उपासना करते हैं। पर देवताओं और गन्धर्वोंपर जो विजय प्राप्त करनेमें समर्थ न हो, ऐसा कोई भी व्यक्ति उस कन्याको जीतनेमें समर्थ नहीं है।

वसुंधरे ! इस प्रकार कहकर नारद मुनि क्षणभर वहाँ ठहरकर फिर महिषासुरसे आज्ञा लेकर तुरंत वहाँसे प्रस्थित हो गये और वे जिधरसे आये थे, उधर ही आकाशकी ओर चले गये।

[अध्याय ९१-९२]


महिषासुरकी मन्त्रणा और देवासुर-संग्राम

भगवान् वराह बोले— नारदजीके चले जानेपर महिषासुर सदा चकितचित्तसे उसी कन्याका ध्यान करने लगा। अतः उसे तनिक भी कहीं चैन न था। अब उसने अपने मन्त्रिमण्डलको बुलाया। उसके आठ मन्त्री थे, जो सभी शूरवीर, नीतिमान् एवं बहुश्रुत थे। वे थे—प्रघस, विघस, शङ्कुकर्ण, विभावसु, विद्युन्माली, सुमाली, पर्जन्य और क्रूर। वे महिषासुरके पास आकर बोले कि 'हमलोगोंके लिये जो सेवाकार्य हो, आप उसकी तुरंत आज्ञा कीजिये।' उनकी बात सुनकर दैत्योंका शासक पराक्रमी महिषासुर बोला—'नारदजीके कथनानुसार मैंने एक कन्याको पानेके लिये तुमलोगोंको यहाँ बुलाया है। मन्त्रियो! देवर्षि नारदने मुझे एक लड़कीकी बात बतायी है; किंतु देवताओंके स्वामी इन्द्रको जीते बिना उसकी प्राप्ति सम्भव नहीं है। अब आप सब लोग विचारकर शीघ्र बतायें कि वह कन्या किस प्रकार सुलभ होगी और देवता कैसे पराजित होंगे?'

महिषासुरके ऐसा कहनेपर सभी मन्त्री अपना-अपना मत बतलाने लगे। प्रघस बोला—'दैत्यवर! आपसे नारदमुनिने जिस कन्याकी बात कही है, वह महान् सती है। उसका नाम 'वैष्णवी' देवी है। उस सुन्दर रूप धारण करनेवाली देवीको पराशक्ति कहा जाता है। जो गुरुकी पत्नी, राजाकी रानी तथा सामन्त, मन्त्री या सेनापतिकी स्त्रियोंके अपहरणकी इच्छा करता है, वह राजा शीघ्र ही नष्ट हो जाता है। प्रघसके इस प्रकार कहनेपर विघसने कहा—'राजन्! उस देवीके विषयमें प्रघसने सत्य बात ही बतलायी है। यदि सब लोगोंका एक मत हो जाय और बुद्धि इस बातका समर्थन करे तो सर्वप्रथम