वेदान्तसार (सदानन्द योगीन्द्र - विद्वन्मनोरञ्जनी व हिन्दी व्याख्या सहित)
Vedantasara of Sadananda with Hindi Commentary
by सदानन्द योगीन्द्र
Source: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (origin)
Page 192 of 314
Read in context१७८ वेदान्तसार को प्रमाणरूप में प्रस्तुत करते हैं। उपर्युक्त गद्यखण्ड के अन्त में उन्होंने दृग्दृश्यविवेक के वचनों को अपने कथन की पुष्टि के लिए प्रयुक्त किया है। (2) ग्रन्थकार ने प्रस्तुत खण्ड के पूर्व अंश में सांसारिकभावना को तुच्छ बताया है। वेदान्त वस्तुतः दृश्यमान सम्पूर्णजगत् को यों भी मिथ्या कहकर उसकी तुच्छता का प्रतिपादन करता ही है। उसकी दृष्टि में ब्रह्म ही एकमात्र सत् (एवं उत्कृष्ट वस्तु है)। (3) अज्ञान की आवरण एवं विक्षेप नामक दो महत्त्वपूर्ण शक्तियों का अत्यन्त सुन्दर एवं सरलशैली में विवेचन किया गया है। अवतरणिका-यहाँ तक अज्ञान एवं उसकी शक्तिद्वय का विवेचन करने के पश्चात् सोदाहरण अज्ञानोपहितचैतन्य को ही सूक्ष्म एवं स्थूलसृष्टि का उपादान एवं निमित्त दोनों कारण बताते हैं- शक्तिद्वयवदज्ञानोपहितं चैतन्यं स्वप्रधानतया निमित्तं स्वोपाधिप्रधानतयोपादानं च भवति। यथा लूता तन्तुकार्यं प्रति स्वप्रधानतया निमित्तं स्वशरीरप्रधानतयोपादानं च भवति॥१९॥ पदच्छेद-शक्तिद्वयवद् अज्ञान-उपहितम् चैतन्यम् स्वप्रधानतया निमित्तम्, स्व-उपाधिप्रधानतया उपादानम् च भवति। यथा लूता तन्तुकार्यम् प्रति स्वप्रधानतया निमित्तम्, स्वशरीरप्रधानतया उपादानम् च भवति॥11॥ अनुवाद-दो शक्तियों से युक्त अज्ञान से उपहित चैतन्य (सम्पूर्ण जगत् प्रपञ्च का) अपनी प्रधानता के कारण निमित्तकारण एवं अपनी उपाधि की प्रधानता से उपादानकारण होता है। जिसप्रकार मकड़ी (अपने) तन्तुरूप कार्य के प्रति अपने (चैतन्य की) प्रधानता के कारण निमित्तकारण तथा अपने शरीर की प्रधानता से उपादानकारण होती है। 'चन्द्रिका'-प्रस्तुत गद्यखण्ड आकार में छोटा होते हुए भी जहाँ एक ओर अपने में गम्भीर अर्थ को संजोए हुए है, वहीं 'आवरण' एवं 'विक्षेप' नामक दो महत्त्वपूर्ण शक्तियों से युक्त अज्ञान से उपहित चैतन्य सूक्ष्मशरीर से लेकर ब्रह्माण्डपर्यन्त दृश्यमान सम्पूर्ण जगत्प्रपञ्च का उपादान और निमित्तकारण दोनो है' इत्यादि वेदान्त के महत्त्वपूर्ण सिद्धान्त का प्रतिपादन करता है। वस्तुतः प्रस्तुत खण्ड के अभिप्राय को समझने से पूर्व हमें उपादान और निमित्तकारण इन दोनों को समझना होगा। किसी भी वस्तु के निर्माण में इन