यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Yajurveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 309, कुल 421 में से
संदर्भ में पढ़ेंउत्तरार्ध चौबीसवां अध्याय विधान मिलता है. आदित्य के लिए न्यंकु नामक हिरण का विधान मिलता है. विश्वों के लिए चकत्तेदार हिरण व साध्य के लिए कुलुंग हिरण का विधान मिलता है. ( २७ ) ईशानाय परस्वत ऽ आलभते मित्राय गौरान्वरुणाय महिषान्बृहस्पतये गवयांस्त्वष्ट्र ऽ उष्ट्रान्.. ( २८ ) ईशान देव हेतु परस्वत मृग, मित्र देव हेतु गौर मृग व वरुण देव हेतु भैंसों का विधान किया गया है. बृहस्पति देव हेतु गायों का और त्वष्टा देव हेतु ऊंटों का विधान किया गया है. ( २८ ) प्रजापतये पुरुषान्हस्तिन ऽ आलभते वाचे प्लुषीँश्चक्षुषे मशकाञ्छ्रोत्राय भृङ्गाः.. ( २९ ) प्रजापति हेतु हाथियों वाक् देव हेतु प्लुषी, चक्षु देव हेतु मच्छर व कानों हेतु भंवरों का विधान किया गया है. ( २९ ) प्रजापतये च वायवे च गोमृगो वरुणायारण्यो मेषो यमाय कृष्णो मनुष्यराजाय मर्कटः शार्दूलाय रोहित्ऋषभाय गवयी क्षिप्रश्येनाय वर्तिका नीलगङ्गोः कृमिः समुद्राय शिशुमारो हिमवते हस्ती.. ( ३० ) प्रजापति तथा वायु देव हेतु गोमृग, वरुण देव हेतु जंगली मेष, यम हेतु कृष्ण मेष, मनुष्यराज हेतु मर्कट, सिंहराज हेतु लाल मृग, ऋषभ हेतु गाय का विधान किया गया है. बाज हेतु बटेर, नीलांग हेतु कृमि, समुद्र हेतु शिशुमार व हिमवान हेतु हाथी का विधान किया गया है. ( ३० ) मयुः प्राजापत्य उलो हलिक्ष्णो वृषदं श्श शस्ते धात्रे दिशां कङ्को धुङ्क्षाग्नेयी कलविङ्को लोहिताहिः पुष्करसादस्ते त्वाष्ट्रा वाचे क्रुञ्चः.. ( ३१ ) प्रजापति के लिए किन्नर ( गायनवादन में कुशल ) उल को नियोजित करने की कृपा करें. खास तौर का शेर और बिलाव धाता देव हेतु नियोजित करने की कृपा करें. दिशा हेतु कंक को नियोजित करने की कृपा करें. आग्नेय दिशा हेतु धुंक्षा नियोजित करें. चिड़ा, लाल सांप और कमलभक्षी पक्षी त्वष्टा देव हेतु नियोजित करें. वाक् हेतु क्रौंच पक्षी को नियोजित करने की कृपा करें. ( ३१ ) सोमाय कुलुङ्ग ऽ आरण्योजो नकुलः शका ते पौष्णाः क्रोष्टा मायोरिन्द्रस्य गौरमृगः पिद्वो न्यङ्कुः कक्कटस्ते ऽ नुमत्यै प्रतिश्रुत्कायै चक्रवाकः.. ( ३२ ) सोम के लिए कुरंग पशु, पूषा देव के लिए जंगली मेष, नेवला तथा मधुमक्खी हैं. वायु के लिए शृगाल, इंद्र के लिए गौरमृग, अनुमति के लिए न्यंकु व प्रतिश्रुत्क देव के लिए चकवा पक्षी है. ( ३२ ) सौरी बलाका शार्गः सृजयः शयाण्डकस्ते मैत्राः सरस्वत्यै शारिः पुरुषवाक् श्वाविद्धौमी शार्दूलो वृकः पृदाकुस्ते मन्यवे सरस्वते शुकः पुरुषवाक्.. ( ३३ ) यजुर्वेद - ३०९