यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Yajurveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 373, कुल 421 में से
संदर्भ में पढ़ेंउत्तरार्ध तैंतीसवां अध्याय कीजिए. सोमरस मधुर है. हम यज्ञ में आप का आह्वान करते हैं. आप अपनी प्रजा की सर्वविधि ( सब प्रकार से ) रक्षा करते हैं. आप प्रजा का पालनपोषण और उन्हें बहुविधि प्रकाशित करते हैं. ( ३० ) उदु त्यं जातवेदसं देवं वहन्ति केतवः. दृशे विश्वाय सूर्यम्.. ( ३१ ) सूर्य सब को प्रकाशित करने वाले, सब कुछ जानने वाले व सारे विश्व को देखने में समर्थ हैं. वे ऊर्ध्वगामी पताका वहन करते हैं. ( ३१ ) येना पावक चक्षसा भुरण्यन्तं जनाँ २ अनु. त्वं वरुण पश्यसि.. ( ३२ ) हे वरुण देव! आप पवित्र बनाने वाले व भरणपोषण करने वाले हैं. आप जिस दृष्टि से देखते हैं. हम भी उसी दृष्टि से ( लोगों को ) देखने में आप का अनुकरण करें. ( ३२ ) दैव्यावध्वर्यू आ गत १४ रथेन सूर्यत्वचा. मध्वा यज्ञ १४ समञ्जाथे. तं प्रत्नथायं वेनश्चित्रं देवानाम्.. ( ३३ ) हे अश्विनीकुमारो! आप दोनों दिव्य व ( यज्ञ के ) अध्वर्यु ( पुरोहित ) हैं. आप सूर्य के समान चमकने वाले रथ से यहां आ जाइए. आप देवताओं के इस यज्ञ को प्रयत्नपूर्वक ( अच्छी तरह से ) पूर्ण कराइए. ( ३३ ) आ न ऽ इडाभिर्विदथे सुशस्ति विश्वानरः सविता देव ऽ एतु. अपि यथा युवानो मत्सथा नो विश्वं जगदभिपित्वे मनीषा.. ( ३४ ) हे सविता देव! आप बहुप्रशंसित, कल्याणकारी व अन्नदाता हैं. आप हमारे यहां यज्ञ स्थान में पधारने की कृपा कीजिए. आप युवा व जगत् के पालनहार हैं. आप हम सभी को अपनी बुद्धि से तृप्त करने की कृपा कीजिए. ( ३४ ) यदद्य कच्च वृत्रहन्नुदगा ऽ अभि सूर्य. सर्वं तदिन्द्र ते वशे.. ( ३५ ) हे इंद्र देव! आप शत्रुनाशी हैं. सूर्य जैसे अंधेरे का नाश करते हैं, वैसे ही आप वृत्र का नाश करते हैं. हे इंद्र देव! सब कुछ आप के ही वश में है. ( ३५ ) तरणिर्विश्वदर्शतो ज्योतिष्कृदसि सूर्य. विश्वमा भासि रोचनम्.. ( ३६ ) हे सूर्य! आप तारक, संसार के लिए दर्शनीय व ज्योति के आविष्कारक हैं. आप अपने प्रकाश से सब को प्रकाशित करने वाले हैं. ( ३६ ) तत्सूर्यस्य देवत्वं तन्महित्वं मध्या कर्तोर्वितत १४ सं जभार. यदेदयुक्त हरितः सधस्थादाद्रात्री वासस्तनुते सिमस्मै.. ( ३७ ) यजुर्वेद – ३७३