भारतकोश
१०८ उपनिषद् (ज्ञान खण्ड - भाग २)

१०८ उपनिषद् (ज्ञान खण्ड - भाग २)

108 Upanishads Part 2 - Gyan Khand

पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा

स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished505 पृष्ठ

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अध्याय ४ ब्राह्मण ५ मन्त्र ५ ३२३ ॥ पञ्चमं ब्राह्मणम् ॥ अथ ह याज्ञवल्क्यस्य द्वे भार्ये बभूवतुर्मैत्रेयी च कात्यायनी च तयोर्ह मैत्रेयी ब्रह्मवादिनी बभूव स्त्रीप्रज्ञैव तर्हि कात्यायन्यथ ह याज्ञवल्क्योऽन्यद्वृत्तमुपाकरिष्यन् ॥ १ ॥ यह प्रख्यात है कि ऋषि याज्ञवल्क्य की दो पत्नियाँ थीं। जिनका नाम मैत्रेयी और कात्यायनी था। इन दोनों में मैत्रेयी ब्रह्मवादिनी और कात्यायनी सामान्य स्त्रियों की तरह ही थी। याज्ञवल्क्य ने अगले आश्रम (वानप्रस्थ) में प्रवृत्त होने की इच्छा से कहा ॥ १ ॥ मैत्रेयीति होवाच याज्ञवल्क्यः प्रव्रजिष्यन्वा अरेऽयमस्मात्स्थानादस्मि हन्त तेऽनया कात्यायन्यान्तं करवाणीति ॥ २ ॥ पत्नी मैत्रेयी से (उन्होंने कहा)-हे मैत्रेयी ! मैं अब वर्तमान स्थान (गृहस्थाश्रम) से अगले स्थान (वानप्रस्थ) में परिव्रज्या हेतु जाना चाहता हूँ। अतः मेरी आकांक्षा है कि दूसरी धर्मपत्नी कात्या