१०८ उपनिषद् (ज्ञान खण्ड - भाग २)
108 Upanishads Part 2 - Gyan Khand
पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा
स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली (उद्गम)
५०७ मन्त्रानुक्रमणिका मन्त्र प्रतीक उपनिषद् विवरण मन्त्र प्रतीक उपनिषद् विवरण यो योनिं योनिमधिति० श्वेता० ४.११ लोकादिमग्निं कठ० १.१.१५ यो योनिं..विश्वानि श्वेता० ५.२ लोकेषु पञ्चविधः छान्दो० २.२.१ यो रहस्योपनिषदं० शु०र० ५३ लोम हिंकारस्त्वक् छान्दो० २.१९.१ यो रेतसि तिष्ठन् बृह० ३.७.२३ वक्त्रेणोत्पलनालेन अमृ० १३ यो वा एतदक्षरं बृह० ३.८.१० वर्णाश्रम..कथ्यः निरा० २४ यो वा एतामेवं केन० ४.९ वाग्वां हिंकारो छान्दो० २.१६.१ यो वाचि तिष्ठन् बृह० ३.७.१७ वासिष्ठाय स्वाहेत. छान्दो० ५.२.५ यो वायौ तिष्ठन् बृह० ३.७.७ वह्नेर्यथा योनिगतस्य श्वेता० १.१३ यो विज्ञाने तिष्ठन् बृह० ३.७.२२ वाक्यार्थस्य विचारोऽथ शु०र० १९ यो वेदादौ स्वरः शु०र० ४८ वागेव ब्रह्मणश्चतुर्थः छान्दो० ३.१८.३ यो वै भूमा तत्सुखम् छान्दो० ७.२३.१ वागेवर्क् प्राणः छान्दो० १.१.५ यो वै स संवत्सरः बृह० १.५.१५ वाघोञ्चक्राम बृह० ६.१.८ योषा वा अग्निर्गौतम बृह० ६.२.१३ वाग्वाव नाम्नो भूयसि छान्दो० ७.२.१ योषा वाव गौतमाग्नि० छान्दो० ५.८.१ वाग्वै ग्रहः बृह० ३.२.३ यो ह खलु वावोपस्थिः मैत्रा० २.४ वाचं धेनुमुपासीत बृह० ५.८.१ यो ह वा आयतनम् छान्दो० ५.१.५ वाच्यं लक्ष्यमिति शु०र० ४० यो ह वा आयतनं वेद० बृह० ६.१.५ वायुरनिलममृतमथेदं ईश० १७ यो ह वै ज्येष्ठम् छान्दो० ५.१.१ वायुरेव सविता गाय० ३.३ यो ह वै ज्येष्ठं च बृह० ६.१.१ वायुर्यथैको कठ० २.२.१० यो ह वै प्रजापतिं वेद बृह० ६.१.६ वायुर्वाव संवर्गो छान्दो० ४.३.१ यो ह वै प्रतिष्ठाम् छान्दो० ५.१.३ वायुः संधानम् तैत्ति० १.३.२ यो ह वै प्रतिष्ठां वेद बृह० ६.१.३ वालाग्रशतभागस्य श्वेता० ५.९ यो ह वै वसिष्ठाम् छान्दो० ५.१.२ विज्ञातं विजिज्ञास्यमस्ति० बृह० १.५.८ यो ह वै वसिष्ठां वेद बृह० ६.१.२ विज्ञानं ब्रह्मेति तैत्ति० ३.५.१ यो ह वै शिशुः साधानः बृह० २.२.१ विज्ञानं यज्ञं तनुते तैत्ति० २.५.१ यो ह वै संपदम् छान्दो० ५.१.४ विज्ञानं वावध्यानाद्भूयो छान्दो० ७.७.१ यो ह वै संपदं वेद बृह० ६.१.४ विज्ञान सारथिर्यस्तु कठ० १.३.९ रक्तांगौ मणिप्रख्यः अमृ० ३६ विज्ञानात्मा सह प्र० ४.११ रहस्योपनिषदं ब्रह्म ध्यातम् शु०र० १८ वितत्य वागम् एका० ४ रहस्योपनिषदाज्ञा शु०र० १५ विद्यां चाविद्याम् ईश० ११ रुधिरं रेचकं चैव अमृ० १० विद्युदेव संविता गाय० ३.९ रूपाण्येव ....एवासावादित्ये बृह० ३.९.१२ विद्युद्वैद्युत्याहु० बृह० ५.७.१ रूपाण्येव यस्यायतनं बृह० ३.९.१५ विद्वानिति च ..जिहान् निरा० ३२ रेत एव यस्यायतनः बृह० ३.९.१७ विनार्दं साम्नो वृणे छान्दो० २.२२.१ रेतो होच्चक्राम बृह० ६.१.१२ विश्वतश्चक्षुरुत श्वेता० ३.३ रैक्वेमानि षट् छान्दो० ४.२.२ विश्वरूपं हरिणम् प्र० १.८ लय विक्षेप रहितं मैत्रा० ४.४ (छ) विश्वे निमृग्रा पदवोः एका० २ लघुत्वमारोग्यमलो श्वेता० २.१२ विश्वेश्वर नमः मैत्रा० ४.४ (ढ) लवणमेतदुदकेऽवधायाथ छान्दो० ६.१३.१ विष्णोर्मोक्ष प्रदक्षम् मुद्ग० १.३ लोकद्वारमपावा..वय छान्दो० २.२४.४ विस्मृत्य विश्वमेकाग्रः ना०बि० ४४ लोकद्वारमपावा..वैश छान्दो० २.२४.८ विस्मृत्य सकलम् ना०बि० ३९ लोकद्वारमपावा..स्वारा छान्दो० २.२४.१२ वृष्टौ पञ्चविध छान्दो० २.३.१
मन्त्रानुक्रमणिका ५०
| मन्त्र प्रतीक | उपनिषद् विवरण | मन्त्र प्रतीक | उपनिषद् विवरण |
|---|---|---|---|
| वेत्थ यथासौ | छान्दो० ५.३.३ | श्रोत्रमेव ब्रह्मणश्चतुर्थः | छान्दो० ३.१८.६ |
| वेत्थ यथेमाः प्रजाः | बृह० ६.२.२ | श्रोत्रस्य श्रोत्रं | केन० १.२ |
| वेत्थ यदि॒तोऽधि | छान्दो० ५.३.२ | श्रोत्रःहोच्चक्राम | छान्दो० ५.१.१० |
| वेदमन्च्याचार्यो | तैत्ति० १.११.१ | श्रोत्र ॱ होच्चक्राम | बृह० ६.१.१० |
| वेदा एव सविता | गाय० ३.११ | श्वेतकेतुर्ह वा आरुणेयः | बृह० ६.२.१ |
| वेदान्तविज्ञान | मुण्ड० ३.२.६ | श्वेतकेतुर्हाऽऽरुणेय आस | छान्दो० ६.१.१ |
| वेदान्ते परमं गुह्यम् | श्वेता० ६.२२ | श्वेतकेतुर्हारुणेयःपञ्चालाना | छान्दो० ५.३.१ |
| वेदाहमेतमजरम् | श्वेता० ३.२१ | श्वोभावा मर्त्यस्य | कठ० १.१.२६ |
| वेदाहमेतं पुरुषम् | श्वेता० ३.८ | षष्ठयामिन्द्रस्य | ना०बि० १५ |
| वैश्वानरः प्रविशति | कठ० १.१.७ | षोडशकलः सोम्य | छान्दो० ६.७.१ |
| व्यानः सर्वेषु चाङ्गेषु | अमृ० ३६ | संकल्पनस्पर्श० | श्वेता० ५.११ |
| व्याने तृप्यति श्रोत्रम् | छान्दो० ५.२०.२ | संकल्पमात्र....बन्धः | निरा० २८ |
| व्रात्यस्त्वं | प्रश्न० २.११ | संकल्पो वाव मनसो | छान्दो० ७.४.१ |
| शं नो मित्रः....ब्रह्म | तैत्ति० १.१२.१ | संन्यासीति च.... इति | निरा० ३९ |
| शं नो मित्रः...ब्रह्म | तैत्ति० १.१.१ | संप्राप्यैनमृषयो | मुण्ड० ३.२.५ |
| शंसन्तमनुशंसन्ति | मन्त्रि० ९ | संभूतिं च विनाशं | ईश० १४ |
| शतं चैका च | कठ० २.३.१६ | संयुक्तमेतत्क्षरमक्षरम् | श्वेता० १.८ |
| शतायुषः पुत्र | कठ० १.१.२३ | संवत्सरो वै | प्रश्न० १.९ |
| शब्दादिविषयान् पञ्च | अमृ० ५ | संविन्मात्रस्थितश्च | स्क० ३ |
| शाकल्येति होवाच | बृह० ३.९.१८ | स इमांल्लोकानसृजत | ऐत० १.१.२ |
| शान्तसंकल्पः | कठ० १.१.१० | स ईक्षत कथं | ऐत० १.३.११ |
| शास्त्राण्यधीत्य मेधावी | अमृ० १ | स ईक्षतेमे नु लोका | ऐत० १.१.३ |
| शिक्षां व्याख्यास्यामः | तैत्ति० १.२.१ | स ईक्षतेमे नु लोकाश्च | ऐत० १.३.१ |
| शिखा च दीपसंकाशा | प्रण० ९ | स ईक्षांचक्रे कस्मिन्न | प्रश्न० ६.३ |
| शिवाय विष्णुरूपाय | स्क० ८ | स एतमेव सीमानं | ऐत० १.३.१२ |
| शिष्य इति च...शिष्यः | निरा० ३१ | स एतां त्रयीं विद्याम् | छान्दो० ४.१७.३ |
| शौनको ह वै | मुण्ड० १.१.३ | स एतास्तिस्रो देवता | छान्दो० ४.१७.२ |
| श्यामाच्छबलम् | छान्दो० ८.१३.१ | स एतेन प्रज्ञे | ऐत० ३.१.४ |
| श्रवणं तु गुरोः पूर्वम् | शु०२० ४३ | स एनान्ब्रह्म | छान्दो० ४.१५.६ |
| श्रवणायापि | कठ० १.२.७ | स एव काले भुवनस्य | श्वेता० ४.१५ |
| श्रीपरम धाप्ने स्वस्ति | स्क० १३ | स एव ज्योतिषाम् | स्क० ५ |
| श्रीवेदव्यास उवाच-देवदेव | शु०२० ४ | स एवं विद्वान् | ऐत० २.१.६ |
| श्रीवेदव्यास उवाच-यथा | शु०२० ७ | स एवाधस्तात्स | छान्दो० ७.२५.१ |
| श्रीशुक उवाच-देवादिदिव | शु०२० ११ | स एष देवोऽम्बरगश्च | एका० ८ |
| श्री सदाशिव उवाच-साधु | शु०२० १४ | स एष परोवरीयानुद्गीथः | छान्दो० १.९.२ |
| श्रुतः ह्येव मे | छान्दो० ४.९.३ | स एष ये चैतस्माद् | छान्दो० १.७.६ |
| श्रूयते प्रथमाभ्यासे | ना०बि ३३ | स एष रसाना ॱ | छान्दो० १.१.३ |
| श्रेयश्च प्रेयश्च | कठ० १.२.२ | स एष वैश्वानरो | प्रश्न० १.७ |
| श्रोतुमिच्छामि | शु०२० १३ | स एष संवत्सरः प्रजा० | बृह० १.५.१४ |
| श्रोतुर्देहेन्द्रियातीतम् | शु०२० ३६ | स ऐक्षत यदि वा | बृह० १.२.५ |
| श्रोत्रं वै ग्रहः | बृह० ३.२.६ | स च पादनारायणो | मुद्ग० २.५ |
| श्रोत्रमेवार्ङ्मनः | छान्दो० १.७.३ | स जातो भूतान् | ऐत० १.३.१३ |
५०९ मन्त्रानुक्रमणिका मन्त्र प्रतीक उपनिषद् विवरण मन्त्र प्रतीक उपनिषद् विवरण स जातो यावदायुषं जीवति छान्दो० ५.१.२ स य एतदेवममृतं...साध्या छान्दो० ३.१०.३ स तत्राजगाम गाय० २.२ स य एतमेवं....आयतन० छान्दो० ४.८.४ स तन्मयो ह्यामृत श्वेता० ६.१७ स य एतमेवं...ज्योति० छान्दो० ४.७.४ स तस्मिन्नेवाकाशे केन० ३.१२ स य एतमेवं विद्वाः छान्दो० ४.५.३ सत्यकामो ह जाबालो छान्दो० ४.४.१ स य एतमेवं विद्वान छान्दो० ३.१९.४ सत्यं ज्ञानमनन्तमानन्द सर्व० १२ स य एतमेवं विद्वान्० छान्दो० ४.१२.२ सत्यमेव जयति मुण्ड० ३.१.६ स य एतमेवं विद्वान्० छान्दो० ४.११.२ सत्येन लभ्यस्तपसा मुण्ड ० ३.१.५ स य एतमेवं...विद्वान्० छान्दो० ४.१३.२ स त्रेधात्मानं व्यकु० बृह० १.२.३ स य एतमेवं...श्रुत्० छान्दो० ४.६.४ स त्वमग्निः कठ० १.१.१३ स य एवमेतत् छान्दो० २.२१.२ स त्वं प्रियान्प्रियरूपा कठ० १.२.३ स य एवमेतद्गायत्रं छान्दो० २.११.२ सदेव सोम्येदमग्र छान्दो० ६.२१ स य एवमेतद्बृहदादित्ये छान्दो० २.१४.२ स नैव व्यभवत्तच्छ्रेयो बृह० १.४.१४ स य एवमेतद्यज्ञाय छान्दो० २.१९.२ स नैव व्यभवत्स विश. बृह० १.४.१२ स य एवमेतद्रथन्तरमग्नौ छान्दो० २.१२.२ स नैव व्यभवत्स शौद्रम् बृह० १.४.१३ स य एवमेतद्राजनम् छान्दो० २.२०.२ स पर्यगाच्छुक्रम ईश० ८ स य एवमेतद्वामदेव्यम् छान्दो० २.१३.२ सप्त प्राणाः प्रभवन्ति मुण्ड० २.१.८ स य एवमेतद्वैराजमृतुषु छान्दो० २.१६.२ स प्राणमसृजत प्रश्न० ६.४ स य एवमेतद्वैरूपम् छान्दो० २.१५.२ स ब्रह्मचारिवृत्तिश्च मंत्रि० ११ स य एवमेताः छान्दो० २.१७.२ स ब्रह्मा स विष्णुः निरा० ८ स य एवमेता रेवत्यः छान्दो० २.१८.२ स ब्रूयान्नास्य छान्दो० ८.१.५ स य एवंवित् तैत्ति० ३.१०.५ समस्तस्य खलु छान्दो० २.१.१ स य एषोऽणिमैतदा० छान्दो० ६.८.७, समाधिनिर्धूतमलस्य मैत्रा० ४.४ (झ) ९,४,१०.३, १२.३, १३.३, १४.३, १५.३ समान उ एवायं छान्दो० १.३.२ स य एषोऽन्तर्हदय तैत्ति० १.६.१ समानमा सांजीवीपुत्रात् बृह० ६.५.४ स यः कामयेत बृह० ६.३.१ समानस्तु द्वयोर्मध्ये अमृ० ३८ स यत्रायमणिमानं न्येति बृह०४.३.३६ समाने तृप्यति मनस् छान्दो० ५.२२.२ स यत्रायमात्माऽबल्यं बृह० ४.४.१ समाने वृक्षे मुण्ड० ३.२.२ स यत्रैतत्स्वप्न्यया बृह० २.१.१८ समाने वृक्षे पुरुषो श्वेता० ४.७ स यथा तत्र नादाहयेत् छान्दो० ६.१६.३ समासक्तं यदा चित्तं मैत्रा० ४.४ (ङ) स यथा दुन्दुभेर्हन्यमा० बृह० २.४.७ समे शुचौ शर्करावह्नि० श्वेता० २.१० स यथा दुन्दुभेर्हन्यमानस्य बृह० ४.५.८ स य आकाशं छान्दो० ७.१२.२ स यथाद्रैंधाग्नेरभ्याहितस्य बृह० ४.५.११ स य आशां ब्रह्मेत्युपास्त छान्दो० ७.१४.२ स यथाद्रैंधाग्नेरभ्याहितात् बृह० २.४.१० स य इच्छेत्पुत्रो मे बृह० ६.४.१४ स यथावीणायै वाद्य० बृह० ४.५.१० स य इदमविद्वान् छान्दो० ५.२४.१ स यथा वीणायै वाद्यमानायै बृह० २.४.९ स य इमांस्त्रींल्लोकान् बृह० ५.१४.६ स यथा शकुनिः छान्दो० ६.८.२ स य एतदेवं छान्दो० २.१.४ स यथा शङ्खस्य बृह० ४.५.९ स य एतदेवममृतं..मरुता. छान्दो० ३.९.३ स यथा शङ्खस्यध्माय० बृह० २.४.८ स य एतदेवममृतं...रुद्रा. छान्दो० ३.७.३ स यथा सर्वासामपा २ बृह० २.४.११ स य एतदेवममृतं..वसूना. छान्दो० ३.६.३ स यथा सर्वासामपा बृह० ४.५.१२ स य एतदेवं विद्वान् छान्दो० १.४.५ स यथा सैन्धवखिल्य बृह० २.४.१२ स य एतदेवममृतं वेदादि. छान्दो० ३.८.३ स यथा सैन्धवघनो० बृह० ४.५.१३
मन्त्रानुक्रमणिका ५१०
| मन्त्र प्रतीक | उपनिषद् विवरण | मन्त्र प्रतीक | उपनिषद् विवरण |
|---|---|---|---|
| स यथा सोम्य | प्रश्न० ४.७ | सर्वास्वप्सु पञ्चविध | छान्दो० २.४.१ |
| स यथेमा नद्यः | प्रश्न० ६.५ | सर्वे तत्र लयम् | ना०बि० ५१ |
| स यथोभयपाद० | छान्दो० ४.१६.५ | सर्वेन्द्रियगुणाभासम् | श्वेता० ३.१७ |
| स यथोर्णनाभि० | बृह० २.१.२० | सर्वे वेदा यत्पदं | कठ० १.२.१५ |
| स यदवोचं प्राणम् | छान्दो० ३.१५.४ | सर्वे स्वरा इन्द्रस्यात्मनः | छान्दो० २.२२.३ |
| स यदशिशिषति | छान्दो० ३.१७.१ | सर्वे स्वरा घोषवन्तो | छान्दो० २.२२.५ |
| स यदा तेजसाभिभूतो | प्रश्न० ४.६ | सलिल एको द्रष्टाऽद्वैतो | बृह० ४.३.३२ |
| स यदि पितरं | छान्दो० ७.१५.२ | स वा अयं पुरुषो जायमानः | बृह० ४.३.८ |
| स यदि पितृलोककामो | छान्दो० ८.२.१ | स वा अयमात्मा ब्रह्म | बृह० ४.४.५ |
| स यद्येकमात्रमभिध्यायीत | प्रश्न० ५.३ | स वा अयमात्मा सर्वेषाम् | बृह० २.५.१५ |
| स यः संकल्पं ब्रह्मेत्युपास्ते | छान्दो० ७.४.३ | स वा ..आत्माऽन्नादो | बृह० ४.४.२४ |
| स यस्तेजो ब्रह्मेत्युपास्ते | छान्दो० ७.११.२ | स वा ..आत्मा योऽयं | बृह० ४.४.२२ |
| स यः स्मरः ब्रह्मेत्युपास्ते | छान्दो० ७.१३.२ | स वा एष आत्मा | छान्दो० ८.३.३ |
| स यश्चित्तं ब्रह्मेत्युपास्ते | छान्दो० ७.५.३ | स वा एष आत्मेत्यदो | मैत्रा० २.१० |
| स यावदादित्यः | छान्दो० ३.६.४ | स वा एष एतस्मिन्बुद्ध | बृह० ४.३.१७ |
| स यामिच्छेत्कामयेत | बृह० ६.४.९ | स वा एष एतस्मिन् स्वप्नान्ते | बृह० ४.३.३४ |
| स यावदादित्य उत्तरत | छान्दो० ३.१०.४ | स वा एष एतस्मिन् स्वप्ने | बृह० ४.३.१६ |
| स यावदादित्य..द्विस्ता | छान्दो० ३.७.४ | स वा एष महानज | बृह० ४.४.२५ |
| स यावदादित्यः पश्चादु० | छान्दो० ३.९.४ | स वा एष शुद्धः | मैत्रा० २.११ |
| स यावदादित्यो दक्षिणत | छान्दो० ३.८.४ | स वा एष.. संप्रसादे | बृह० ४.३.१५ |
| स योध्यानं ब्रह्मेत्युपास्ते | छान्दो० ७.६.२ | स वा एषं सूक्ष्मो | मैत्रा० २.५ |
| स यो नाम ब्रह्मेत्युपास्ते | छान्दो० ७.१.५ | सवित्रा प्रसवेन जुवेत | श्वेता० २.७ |
| स योऽन्नं ब्रह्मेत्युपास्ते | छान्दो० ७.९.२ | स विश्वकृद्विश्वविदात्म. | श्वेता० ६.१६ |
| स योऽपो ब्रह्मेत्युपास्त | छान्दो० ७.१०.२ | स वृक्षकालाकृतिभिः | श्वेता० ६.६ |
| स यो बलं ब्रह्मेत्युपास्ते | छान्दो० ७.८.२ | स वेदैतत्परमं | मुण्ड० ३.२.१ |
| स यो मनुष्याणां | बृह० ४.३.३३ | स वै नैव रेमे तस्मादेकाकी | बृह० १.४.३ |
| स यो मनो ब्रह्मेत्युपास्ते | छान्दो० ७.३.२ | स वै वाचमेव प्रथमामत्यवहत्सा | बृह० १.३.१२ |
| स यो वाचं ब्रह्मेत्युपास्ते | छान्दो० ७.२.२ | सव्याहृतिं सप्रणवाम् | अमृ० ११ |
| स यो विज्ञानं ब्रह्मेत्युपास्ते | छान्दो० ७.७.२ | सशब्दश्चाक्षरे | ना०बि० ४९ |
| स यो ह वै तत्परमं | मुण्ड० ३.२.९ | स समित्पाणि.. तद्य | छान्दो० ८.१०.३ |
| सर्वकर्मा सर्वकामः | छान्दो० ३.१४.४ | स समित्पाणिः .... पुनरेयाय | छान्दो० ८.९.२ |
| सर्वचिन्तां समुत्सृज्य | ना०बि० ४१ | स समित्पाणिः ... नाह | छान्दो० ८.११.२ |
| सर्वज्ञो भवतु क्षिप्रम् | शु०र० ८ | स सर्ववेत्ता भुवनस्य | एका० ९ |
| सर्वतः पाणिपादम् | श्वेता० ३.१६ | स सविता सावित्र्या | गाय० ४.२ |
| सर्वं ह्येतद्ब्रह्मा | माण्डू० २ | स ह क्षत्ताऽन्विष्य | छान्दो० ४.१.७ |
| सर्वं खल्विदं..किंचन | निरा० ९ | स ह खादित्वा | छान्दो० १.१०.५ |
| सर्वं खल्विदं ब्रह्म | छान्दो० ३.१४.१ | स ह गौतमो राज्ञो० | छान्दो० ५.३.६ |
| सर्वं चेदं क्षयिष्णु | मैत्रा० १.४ | स ह द्वादशवर्ष | छान्दो० ६.१.२ |
| सर्वव्यापिनमात्मानं | श्वेता० १.१६ | सह नौ यशः | तैत्ति० १.३.१ |
| सर्वा जीवे सर्व संस्थे | श्वेता० १.६ | स ह पञ्चदशाहानि | छान्दो० ६.७.२ |
| सर्वा दिश ऊर्ध्वमधश्च | श्वेता० ५.४ | स ह प्रजापतिरीक्षांचक्रे | बृह० ६.४.२ |
| सर्वाननशिरोग्रीवः | श्वेता० ३. | स ह प्रातः संजिहान | छान्दो० १.१०.६ |
५११ मन्त्रानुक्रमणिका मन्त्र प्रतीक उपनिषद् विवरण मन्त्र प्रतीक उपनिषद् विवरण स ह मैत्रेयः प्रातः गाय० २.४ स होवाच ... वै खलु बृह० ४.५.५ स ह मैत्रेयः स्वानन्तेवासीन गाय० २.३ स होवाचात्र वा गाय० २.५ स ह मौद्गल्यः गाय० २.१ स होवाचा... पुरुष बृह० २.१.१६ स ह व्याधिना छान्दो० ४.१०.३ स होवाचा...पुरुषस्तदेषां बृह० २.१.१७ स ह शिलंकः छान्दो० १.८.३ स होवाचाजातशत्रुः प्रति बृह० २.१.१५ सं ह संपादयां चकार छान्दो० ५.११.३ स होवाचाजातशत्रोरेतावन्नू बृह० २.१.१४ सहस्रशीर्षा पुरुषः श्वेता० ३.१४ स होवाचैतदेवात्रात्विषम् गाय० २.६ सहस्रार्णमती ना०बि० ५ स होवाचैतद्वै तदक्षरम् बृह० ३.८.८ सह हारिद्रुमतम् छान्दो० ४.४.३ स होवाचोवाच वै सो बृह० ३.३.२ स हाशाथ हैनमुपससाद छान्दो० ६.७.४ स होवाचोषस्तश्चाक्रायणो बृह० ३.४.२ स हेभ्यं कुल्माषान् छान्दो० १.१०.२ सा चेदस्मै दद्यात् बृह० ६.४.८ स होवाच ... आकाश एव बृह० ३.८.७ सा चेदस्मै न बृह० ६.४.७ स होवाच...आकाशे तदोतं बृह० ३.८.४ सा ब्रह्मेति केन० ४.१ स होवाच ... ईश्वर इति च निरा० ४ सा भावयित्री ऐत० २.१.३ स होवाच ... एवायमग्नौ बृह० २.१.७ साम प्राणो वै साम बृह० ५.१३.३ स होवाच...एवायं छायामयः बृह० २.१.१२ सामवेदस्तथा प्रण० ६ स होवाच ... एवायमप्सु बृह० २.१.८ सामैश्चिन्दन्तो एका० १० स होवाच ... एवायमाकाशे बृह० २.१.५ सा वा एषा देवता बृह० १.३.९ स होवाच...एवायमात्मनि बृह० २.१.१३ सा वा ... पाप्मानं मृत्युमपहत्य बृह० १.३.१० स होवाच... एवायमादर्शे बृह० २.१.९ सा वा...मृत्युमपहत्या- बृह० १.३.११ स होवाच...एवासावादित्ये बृह० २.१.२ सा ह वागुच्चक्राम छान्दो० ५.१.८ स होवाच किं मेऽन्नम् छान्दो० ५.२.१ सा ह वागुवाच बृह० ६.१.१४ स होवाच किं मे वासो छान्दो० ५.२.२ सा हैनमुवाच नाहम् छान्दो० ४.४.२ स होवाच ... चन्द्रे बृह० २.१.३ सा होवाच नमस्तेऽस्तु बृह० ३.८.५ स होवाच... तात जानीथा बृह० ६.२.४ सा होवाच....नामृता बृह० ४.५.४ स होवाच ...दिक्षु बृह० २.१.११ सा होवाच ब्राह्मणा बृह० ३.८.१२ स होवाच देवेषु वै बृह० ६.२.६ सा होवाच मैत्रेयी यन्नु बृह० २.४.२ स होवाच न वा अरे पत्युः बृह० २.४.५ सा होवाच मैत्रेयी येनाहम् बृह० २.४.३ स होवाच ... पत्युः बृह० ४.५.६ सा होवाच मैत्रेय्यत्रैव बृह० २.४.१३ स होवाच पितरं कठ० १.१.४ सा होवाच मैत्रेय्यत्र मा बृह० ४.५.१४ स होवाच प्रतिज्ञातो बृह० ६.२.५ सा होवाच यदूर्ध्वं बृह० ३.८.३ स होवाच भगवन्तं छान्दो० १.११.२ सा होवाच...याज्ञवल्क्य बृह० ३.८.६ स होवाच महात्मन छान्दो० ४.३.६ सा होवाच...वित्तेन पूर्णाः बृह० ४.५.३ स होवाच महिमान बृह० ३.९.२ सा होवाचाहं वै त्वा बृह० ३.८.२ स होवाच यथा नस्त्वं बृह० ६.२.८ सिद्धासने स्थितो ना०बि० ३१ स होवाच ... यन्तम् बृह० २.१.१० सुकेशा च भारद्वाजः प्रश्न० १.१ स होवाच याज्ञवल्क्यः बृह० २.४.४ सुखदुःखबुद्ध्या सर्व० ६ स होवाचगर्वेढं छान्दो० ७.१.२ सुखमिति ... सुखम् निरा० १५ स होवाच वायुवैं गौतम बृह० ३.७.२ सुवरित्यादित्ये मह तैत्ति० १.६.२ स होवाच ... वायौ बृह० २.१.६ सुषारथिरश्वानिव शि०सं० ६ स होवाच विज्ञायते बृह० ६.२.७ सुषुप्तस्थानः माण्डू० ११ स होवाच ... विद्युति बृह० २.१.४ सूक्ष्मातिसूक्ष्मम् श्वेता० ४.१४