१०८ उपनिषद् (ज्ञान खण्ड - भाग २)
108 Upanishads Part 2 - Gyan Khand
पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा
स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली (उद्गम)
मन्त्रानुक्रमणिका ५१०
| मन्त्र प्रतीक | उपनिषद् विवरण | मन्त्र प्रतीक | उपनिषद् विवरण |
|---|---|---|---|
| स यथा सोम्य | प्रश्न० ४.७ | सर्वास्वप्सु पञ्चविध | छान्दो० २.४.१ |
| स यथेमा नद्यः | प्रश्न० ६.५ | सर्वे तत्र लयम् | ना०बि० ५१ |
| स यथोभयपाद० | छान्दो० ४.१६.५ | सर्वेन्द्रियगुणाभासम् | श्वेता० ३.१७ |
| स यथोर्णनाभि० | बृह० २.१.२० | सर्वे वेदा यत्पदं | कठ० १.२.१५ |
| स यदवोचं प्राणम् | छान्दो० ३.१५.४ | सर्वे स्वरा इन्द्रस्यात्मनः | छान्दो० २.२२.३ |
| स यदशिशिषति | छान्दो० ३.१७.१ | सर्वे स्वरा घोषवन्तो | छान्दो० २.२२.५ |
| स यदा तेजसाभिभूतो | प्रश्न० ४.६ | सलिल एको द्रष्टाऽद्वैतो | बृह० ४.३.३२ |
| स यदि पितरं | छान्दो० ७.१५.२ | स वा अयं पुरुषो जायमानः | बृह० ४.३.८ |
| स यदि पितृलोककामो | छान्दो० ८.२.१ | स वा अयमात्मा ब्रह्म | बृह० ४.४.५ |
| स यद्येकमात्रमभिध्यायीत | प्रश्न० ५.३ | स वा अयमात्मा सर्वेषाम् | बृह० २.५.१५ |
| स यः संकल्पं ब्रह्मेत्युपास्ते | छान्दो० ७.४.३ | स वा ..आत्माऽन्नादो | बृह० ४.४.२४ |
| स यस्तेजो ब्रह्मेत्युपास्ते | छान्दो० ७.११.२ | स वा ..आत्मा योऽयं | बृह० ४.४.२२ |
| स यः स्मरः ब्रह्मेत्युपास्ते | छान्दो० ७.१३.२ | स वा एष आत्मा | छान्दो० ८.३.३ |
| स यश्चित्तं ब्रह्मेत्युपास्ते | छान्दो० ७.५.३ | स वा एष आत्मेत्यदो | मैत्रा० २.१० |
| स यावदादित्यः | छान्दो० ३.६.४ | स वा एष एतस्मिन्बुद्ध | बृह० ४.३.१७ |
| स यामिच्छेत्कामयेत | बृह० ६.४.९ | स वा एष एतस्मिन् स्वप्नान्ते | बृह० ४.३.३४ |
| स यावदादित्य उत्तरत | छान्दो० ३.१०.४ | स वा एष एतस्मिन् स्वप्ने | बृह० ४.३.१६ |
| स यावदादित्य..द्विस्ता | छान्दो० ३.७.४ | स वा एष महानज | बृह० ४.४.२५ |
| स यावदादित्यः पश्चादु० | छान्दो० ३.९.४ | स वा एष शुद्धः | मैत्रा० २.११ |
| स यावदादित्यो दक्षिणत | छान्दो० ३.८.४ | स वा एष.. संप्रसादे | बृह० ४.३.१५ |
| स योध्यानं ब्रह्मेत्युपास्ते | छान्दो० ७.६.२ | स वा एषं सूक्ष्मो | मैत्रा० २.५ |
| स यो नाम ब्रह्मेत्युपास्ते | छान्दो० ७.१.५ | सवित्रा प्रसवेन जुवेत | श्वेता० २.७ |
| स योऽन्नं ब्रह्मेत्युपास्ते | छान्दो० ७.९.२ | स विश्वकृद्विश्वविदात्म. | श्वेता० ६.१६ |
| स योऽपो ब्रह्मेत्युपास्त | छान्दो० ७.१०.२ | स वृक्षकालाकृतिभिः | श्वेता० ६.६ |
| स यो बलं ब्रह्मेत्युपास्ते | छान्दो० ७.८.२ | स वेदैतत्परमं | मुण्ड० ३.२.१ |
| स यो मनुष्याणां | बृह० ४.३.३३ | स वै नैव रेमे तस्मादेकाकी | बृह० १.४.३ |
| स यो मनो ब्रह्मेत्युपास्ते | छान्दो० ७.३.२ | स वै वाचमेव प्रथमामत्यवहत्सा | बृह० १.३.१२ |
| स यो वाचं ब्रह्मेत्युपास्ते | छान्दो० ७.२.२ | सव्याहृतिं सप्रणवाम् | अमृ० ११ |
| स यो विज्ञानं ब्रह्मेत्युपास्ते | छान्दो० ७.७.२ | सशब्दश्चाक्षरे | ना०बि० ४९ |
| स यो ह वै तत्परमं | मुण्ड० ३.२.९ | स समित्पाणि.. तद्य | छान्दो० ८.१०.३ |
| सर्वकर्मा सर्वकामः | छान्दो० ३.१४.४ | स समित्पाणिः .... पुनरेयाय | छान्दो० ८.९.२ |
| सर्वचिन्तां समुत्सृज्य | ना०बि० ४१ | स समित्पाणिः ... नाह | छान्दो० ८.११.२ |
| सर्वज्ञो भवतु क्षिप्रम् | शु०र० ८ | स सर्ववेत्ता भुवनस्य | एका० ९ |
| सर्वतः पाणिपादम् | श्वेता० ३.१६ | स सविता सावित्र्या | गाय० ४.२ |
| सर्वं ह्येतद्ब्रह्मा | माण्डू० २ | स ह क्षत्ताऽन्विष्य | छान्दो० ४.१.७ |
| सर्वं खल्विदं..किंचन | निरा० ९ | स ह खादित्वा | छान्दो० १.१०.५ |
| सर्वं खल्विदं ब्रह्म | छान्दो० ३.१४.१ | स ह गौतमो राज्ञो० | छान्दो० ५.३.६ |
| सर्वं चेदं क्षयिष्णु | मैत्रा० १.४ | स ह द्वादशवर्ष | छान्दो० ६.१.२ |
| सर्वव्यापिनमात्मानं | श्वेता० १.१६ | सह नौ यशः | तैत्ति० १.३.१ |
| सर्वा जीवे सर्व संस्थे | श्वेता० १.६ | स ह पञ्चदशाहानि | छान्दो० ६.७.२ |
| सर्वा दिश ऊर्ध्वमधश्च | श्वेता० ५.४ | स ह प्रजापतिरीक्षांचक्रे | बृह० ६.४.२ |
| सर्वाननशिरोग्रीवः | श्वेता० ३. | स ह प्रातः संजिहान | छान्दो० १.१०.६ |
५११ मन्त्रानुक्रमणिका मन्त्र प्रतीक उपनिषद् विवरण मन्त्र प्रतीक उपनिषद् विवरण स ह मैत्रेयः प्रातः गाय० २.४ स होवाच ... वै खलु बृह० ४.५.५ स ह मैत्रेयः स्वानन्तेवासीन गाय० २.३ स होवाचात्र वा गाय० २.५ स ह मौद्गल्यः गाय० २.१ स होवाचा... पुरुष बृह० २.१.१६ स ह व्याधिना छान्दो० ४.१०.३ स होवाचा...पुरुषस्तदेषां बृह० २.१.१७ स ह शिलंकः छान्दो० १.८.३ स होवाचाजातशत्रुः प्रति बृह० २.१.१५ सं ह संपादयां चकार छान्दो० ५.११.३ स होवाचाजातशत्रोरेतावन्नू बृह० २.१.१४ सहस्रशीर्षा पुरुषः श्वेता० ३.१४ स होवाचैतदेवात्रात्विषम् गाय० २.६ सहस्रार्णमती ना०बि० ५ स होवाचैतद्वै तदक्षरम् बृह० ३.८.८ सह हारिद्रुमतम् छान्दो० ४.४.३ स होवाचोवाच वै सो बृह० ३.३.२ स हाशाथ हैनमुपससाद छान्दो० ६.७.४ स होवाचोषस्तश्चाक्रायणो बृह० ३.४.२ स हेभ्यं कुल्माषान् छान्दो० १.१०.२ सा चेदस्मै दद्यात् बृह० ६.४.८ स होवाच ... आकाश एव बृह० ३.८.७ सा चेदस्मै न बृह० ६.४.७ स होवाच...आकाशे तदोतं बृह० ३.८.४ सा ब्रह्मेति केन० ४.१ स होवाच ... ईश्वर इति च निरा० ४ सा भावयित्री ऐत० २.१.३ स होवाच ... एवायमग्नौ बृह० २.१.७ साम प्राणो वै साम बृह० ५.१३.३ स होवाच...एवायं छायामयः बृह० २.१.१२ सामवेदस्तथा प्रण० ६ स होवाच ... एवायमप्सु बृह० २.१.८ सामैश्चिन्दन्तो एका० १० स होवाच ... एवायमाकाशे बृह० २.१.५ सा वा एषा देवता बृह० १.३.९ स होवाच...एवायमात्मनि बृह० २.१.१३ सा वा ... पाप्मानं मृत्युमपहत्य बृह० १.३.१० स होवाच... एवायमादर्शे बृह० २.१.९ सा वा...मृत्युमपहत्या- बृह० १.३.११ स होवाच...एवासावादित्ये बृह० २.१.२ सा ह वागुच्चक्राम छान्दो० ५.१.८ स होवाच किं मेऽन्नम् छान्दो० ५.२.१ सा ह वागुवाच बृह० ६.१.१४ स होवाच किं मे वासो छान्दो० ५.२.२ सा हैनमुवाच नाहम् छान्दो० ४.४.२ स होवाच ... चन्द्रे बृह० २.१.३ सा होवाच नमस्तेऽस्तु बृह० ३.८.५ स होवाच... तात जानीथा बृह० ६.२.४ सा होवाच....नामृता बृह० ४.५.४ स होवाच ...दिक्षु बृह० २.१.११ सा होवाच ब्राह्मणा बृह० ३.८.१२ स होवाच देवेषु वै बृह० ६.२.६ सा होवाच मैत्रेयी यन्नु बृह० २.४.२ स होवाच न वा अरे पत्युः बृह० २.४.५ सा होवाच मैत्रेयी येनाहम् बृह० २.४.३ स होवाच ... पत्युः बृह० ४.५.६ सा होवाच मैत्रेय्यत्रैव बृह० २.४.१३ स होवाच पितरं कठ० १.१.४ सा होवाच मैत्रेय्यत्र मा बृह० ४.५.१४ स होवाच प्रतिज्ञातो बृह० ६.२.५ सा होवाच यदूर्ध्वं बृह० ३.८.३ स होवाच भगवन्तं छान्दो० १.११.२ सा होवाच...याज्ञवल्क्य बृह० ३.८.६ स होवाच महात्मन छान्दो० ४.३.६ सा होवाच...वित्तेन पूर्णाः बृह० ४.५.३ स होवाच महिमान बृह० ३.९.२ सा होवाचाहं वै त्वा बृह० ३.८.२ स होवाच यथा नस्त्वं बृह० ६.२.८ सिद्धासने स्थितो ना०बि० ३१ स होवाच ... यन्तम् बृह० २.१.१० सुकेशा च भारद्वाजः प्रश्न० १.१ स होवाच याज्ञवल्क्यः बृह० २.४.४ सुखदुःखबुद्ध्या सर्व० ६ स होवाचगर्वेढं छान्दो० ७.१.२ सुखमिति ... सुखम् निरा० १५ स होवाच वायुवैं गौतम बृह० ३.७.२ सुवरित्यादित्ये मह तैत्ति० १.६.२ स होवाच ... वायौ बृह० २.१.६ सुषारथिरश्वानिव शि०सं० ६ स होवाच विज्ञायते बृह० ६.२.७ सुषुप्तस्थानः माण्डू० ११ स होवाच ... विद्युति बृह० २.१.४ सूक्ष्मातिसूक्ष्मम् श्वेता० ४.१४