१०८ उपनिषद् (साधना खण्ड - भाग ३)
108 Upanishads Part 3 - Sadhana Khand
पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा
स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली (उद्गम)
पृष्ठ 195, कुल 572 में से
संदर्भ में पढ़ेंत्रिशिखिब्राह्मणोपनिषत् ] [ १८७ CC0. In Public Domain. Digitization by eGangotri अवकाशविधूतदर्शनपिण्डीकारणाधारणाः सूक्ष्मतमा जैव- तन्मात्रविषयाः ॥ ७ ॥ एवं द्वादशाङ्गानि आध्यात्मिकान्याधिभौतिकान्याधिदैवि- कानि । अत्र निशाकरचतुर्मुखदिग्वातार्कवरुणाश्व्यनीन्द्रोपेन्द्र- प्रजापतियमा अक्षाधिदेवतारूपैर्द्वादशनाड्यन्तःप्रवृत्ताः प्राणा एवाङ्गानि अङ्गज्ञानं तदेव ज्ञातेति ॥ ८ ॥ अथ व्योमानिलानलजलान्नानां पञ्चीकरणमिति । ज्ञातृत्वं समानयोगेन श्रोत्रद्वारा शब्दगुणो वागधिष्ठित आकाशे तिष्ठति आकाशस्तिष्ठति । मनो व्यानयोगेन त्वग्द्वारा स्पर्शगुणः पाण्यधि- ष्ठितो वायौ तिष्ठति वायुयुस्तिष्ठति । बुद्धिरुदानयोगेन चक्षुर्द्वारा रूपगुणः पादाधिष्ठितोऽग्नौ तिष्ठत्यग्निस्तिष्ठति । चित्तमपान- योगेन जिह्वाद्बारा रसगुण उपस्थाधिष्ठितोऽप्सु तिष्ठत्यापस्ति- ष्ठन्ति । अहंकारः प्राणयोगेन घ्राणद्वारा गन्धगुणो गुदाधिष्ठितः पृथिव्यां तिष्ठति पृथिवी तिष्ठतीत्येवं वेद ॥ ६ ॥ ज्ञान, संकल्प, निश्चय, अनुसंधान अभिमान आकाश के कार्य तथा अन्तःकरण के विषय है । समीकरण, नेत्र खोलना, पकड़ना, सुनना, उच्छ्वास---ये वायु के कार्य और प्राणादि के विषय हैं । शब्द, स्पर्श रूप, रस, गन्ध, ये अग्नि के कार्य और ज्ञानेन्द्रियों के विषय हैं और जल के आश्रित हैं । बोलना, दान, गमन, विसर्जन तथा आनन्द पृथ्वी के कार्य तथा कर्मेन्द्रियों के विषय हैं । ज्ञानेन्द्रियों और कर्मेन्द्रियों के विषयों में प्राण तथा तन्मात्राओं के विषय भी अन्तर्भूत हैं । मन और बुद्धि में चित्त और अहङ्कार अन्तर्भूत हैं । अवकाश, हटाना, दर्शन, धारणा, सूक्ष्मतम तन्मात्रा के विषय हैं । इस प्रकार बारह अङ्ग हैं, जो आध्या- त्मिक, आधिभौतिक और अधिदैविक—तीनों भागों में हैं । इनमें चन्द्रमा, Sri Sri Anandamayee Ashram Collection, Varanasi