भारतकोश
१०८ उपनिषद् (साधना खण्ड - भाग ३)

१०८ उपनिषद् (साधना खण्ड - भाग ३)

108 Upanishads Part 3 - Sadhana Khand

पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा

स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished572 पृष्ठ

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गरुडोपनिषत् ] [ ४४३ फट् स्वाहा ॥ चन्द्रमण्डलसंकाश सूर्यमण्डलमुष्टिक । पृथ्वो- मण्डलमुद्राङ्ग श्रीमद्भागुरुडायविषं हरहंर हुं फट् स्वाहा ॥ ॐ क्षिप स्वाहा ॥ ओमीं सचरति सचरति तत्कारी मत्कारी विषाणां च विषरूपिणी विषदूषिणी विषशोषणी विषनाशिनी विषहारिणी हतं विषं नष्टं विषमन्त प्रलीन विषं प्रनष्टं विषं हतं ते ब्रह्मणा विषं हतमिन्द्रस्य वज्रेण स्वाहा ॥ ॐ नमो भगवते महागुरडाय विष्णुवाहनाय त्रैलोक्यपरिपूजिताय वज्रन- खवज्रतुण्डाय वज्रपक्षालकृतशरीराय एह्येहि महागुरड विषं छिन्धिच्छिन्धि आवेशयावेशय हुं फट् स्वाहा ॥ सुपर्णोऽसि गरुत्मान्त्रिवृत्ते शिरो गायत्र चक्षुः स्तोम आत्मा साम ते तनूर्वाम- देव्यं बृहद्रथन्तरे पक्षौ यज्ञायज्ञियं पुच्छ छन्दांस्यङ्गानि धिष्ण्या शफा यजूंषि नाम ॥ सुपर्णोसि गरुत्मान्दिव गच्छ सुवः पत ओमीं ब्रह्मविद्याममावास्यायां पौर्णमास्यां पुरोवाच सचरति सचरति तत्कारी मत्कारी विषनांशिगी विषदूहिणी विषहारिणी हतं विषं नष्टं विषं नष्टं विषं प्रनष्टं विषं हतमिन्द्रस्य वज्रेण विषं हतं ते ब्रह्मणा विषमिन्द्रस्य वज्रेण स्वाहा ॥ तस्यम् '? ) । इस प्रकार तीनों सन्ध्याओं के समय नागभूषण गरुड़ का ध्यान करना चाहिये । इनके ध्यान से विष ऐसे समाप्त हो जाता है जैसे आग द्वारा रुई का ढेर । ६ । अब अधोलिखित मन्त्रों का उच्चारण विषनाश करने के लिये करना चाहिये और उस स्थान को झाड़ना चाहिये । इन्हीं मन्त्रों से होम भी सिद्धि प्राप्ति के निमित्त करना चाहियेः— ॐ मी मों नमोः भगवते ॰॰ .... ...भस्मां कुरु भस्मी कुरु हुं फट् स्वाहा । १.। चन्द्रमण्डलसंकाश... ... ...विषं हर हर हुँ फट् स्वाहा ॐ क्षिप स्वाहा । २ ।