१०८ उपनिषद् (साधना खण्ड - भाग ३)
108 Upanishads Part 3 - Sadhana Khand
पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा
स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें४५८ ] [ गायत्री रहस्योपनिषत् स्वरूप के समान, मध्यमा सन्ध्या बैल पर आरूढ़ शंकर स्वरूपिणी तथा अन्तिम सायंकालीन गरुड़ के ऊपर स्थित तथा विष्णु स्वरूप चतुर्भुजा शस्त्रादिवरा हैं । पूर्वाह्नकाल वाली सन्ध्या गायत्री, कुमारी लाल वर्ण, लाल वस्त्र वाली, लाल चन्दन, लाल मालाओं को धारण करने वाली, पाश, अंकुश, अक्षमाला कमण्डलु आदियों से शोभित हाथ वाली, हंस में बैठी, ब्रह्माधि- देवता, ब्रह्मस्वरूपिणी ऋग्वेद सहित, सूर्य के मार्ग में विचरण करने वाली तथा पृथिवी पर निवास करने वाली है । मध्याह्न काल वाली जो सन्ध्या है वह युवती, स्वच्छ सफेद वर्ण वाली, सफेद वस्त्रों को धारण करने वाली, सफेद चन्दन तथा मालायें धारण करने वाली, त्रिशूल तथा डमरू धारण किए, बैल पर बैठी, रुद्राधिदेवता, यजुर्वेद युक्त (यजुर्वेद जिसके एक हाथ में पुस्तक रूप में विराजमान है ) सूर्य मार्ग में सञ्चरण करने वाली, आकाश में स्थित रहने वाली है । सायंकालीन सन्ध्या सरस्वती है । वह बूढ़ी काले रङ्ग की, काले वस्त्रों को धारण करने वाली, काले गन्ध तथा माला का अनुलेपन करने वाली, शङ्ख, चक्र तथा गदा लिए गरुड़ पर स्थित विष्णु अधिदैवत्य ( विष्णु जिसका अधिदेवता है ) सामवेद युक्त सूर्य मार्गगामी तथा स्वर्ग लोक में निवास करने वाली है । अग्निवायुसूर्यरूपाऽऽहवनीयगार्हपत्यदक्षिणाग्निरूपा ऋग्यजुः- सामरूपाभूर्भुवःस्वरितिध्याहृतिरूपाप्रातर्मध्याह्नतृतीयसवनात्मिका सत्वरजस्तमोगुणात्मिका जाग्रत्स्वप्नषुसुप्तरूपा वसुरुद्रादित्यरूपा गायत्रीत्रिष्टुब्जगतीरूपा ब्रह्मशङ्करविष्णुरूपेच्छाज्ञानक्रियाशक्ति- रूपा स्वराड्विराड्वषड् ब्रह्मरूपेति । प्रथममाग्नेयं द्वितीयं प्राजा- पत्यं तृतीय सौम्यं चतुर्थमीशानं पञ्चममादित्यं षष्ठंगार्हपत्यं सप्तमं