१०८ उपनिषद् (साधना खण्ड - भाग ३)
108 Upanishads Part 3 - Sadhana Khand
पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा
स्रोत: संस्कृति संस्थान बरेली · संस्कृति संस्थान बरेली (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंसांस्कृतिक विचारधारा के प्रसार का प्रतिनिधि मासिकपत्र "युग-संस्कृति" 'युग-संस्कृति' युग की वाणी व पुकार है। इसका उद्देश्य नवीन, आधुनिक, वैज्ञानिक ढंग से भारतीय संस्कृति की विशेषताओं, विचार- धाराओं व परम्पराओं का बौद्धिक आधार पर प्रतिपादन करना है। भारतीय तत्वज्ञान के मूलाधार तत्वों का स्पष्टीकरण करके संस्कृति के विशुद्ध व परिष्कृत रूप को जनता के सम्मुख रखना है। व्रत, त्यौहार, रीतिरिवाजों, आचार विचार, पूजा उपासना पद्धति की मनोवैज्ञानिक उपयोगिता को प्रस्तुत करना है। वेद-विज्ञान, संस्कार-विज्ञान, योग- विज्ञान, परलोक-विज्ञान, तुलसी-विज्ञान, पुराण-विज्ञान पर प्रकाश डालना है। ऋषि चरित्रों, व्रत कथाओं व पुराणों में असम्भव दिखाई देने वाली कथाओं में निहित वास्तविक तथ्यों का अनुसन्धान करना है। उपनिषदों की ज्ञान गंगा का प्रवाह, स्मृतियों की नीति, रामायण की पारिवारिक शिक्षा व गीता का तात्विक विवेचन इसकी विशेषता है। धर्म व संस्कृति की भावना का व्यापक विस्तार, समाज का नव-निर्माण, व नैतिक पुनरु- त्थान इसका लक्ष्य है। यदि आप अपने धर्म के प्रत्येक अंग को आधुनिक विज्ञान की कसौटी पर खरा उतरता देखना चाहते हैं तो युग-संस्कृति को पढ़ें। पत्रिका साइज के ३६ पृष्ठों व बढ़िया ग्लेज कागज के दोरंगे टाइटल से सुसज्जित होने पर भी मूल्य केवल ३) वार्षिक है। नमूने की प्रति मुफ्त मँगाइये प्रकाशक : संस्कृति संस्थान, ख्वाजाकुतुब, बरेली (उ० प्र०)