१८५७ का स्वातंत्र्य समर (वीर विनायक दामोदर सावरकर)
1857: The Indian War of Independence by Veer Savarkar
विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंप्रकरण-7 गुप्त संगठन जैसाकि पिछले अध्याय में वर्णन किया गया है, जब सारे हिंदुस्तान में क्रांति की सामग्री इधर-उधर तैयार हो रही थी तब उस सामग्री की यथोचित योजना कैसे तैयार की जाए और उसमें क्रांतियुद्ध का भवन किस तरह बनाया जाए, इसका नक्शा ब्रह्मवर्त में तैयार हो रहा था। पूर्व प्रकरण में हमने अजीमुल्ला खान को यूरोप प्रवास पर छोड़ दिया था। उस प्रवास में जाने के पहले लंदन में उसी समय सतारा की गद्दी का झगड़ा सुलझाने हेतु रंगो बापूजी नामक एक चतुर और कर्मठ सज्जन गए हुए थे, उनसे अजीमुल्ला खान ने भेंट की। सतारा की गद्दी का प्रेत दहन करते आए हुए रंगों बापूजी और पेशवा की गद्दी का प्रेत दहन करने आए अजीमुल्ला खान, इनकी उन दोनों इतिहास-प्रसिद्ध गद्दियों के प्रेत संस्कार के समय क्या वार्त्ता हुई, अपने देश का सर्वनाश करनेवाले फिरंगियों की पिटाई करने के लिए उन्होंने कैसी शपथ लीं और हिंदुस्तान में लौटकर सतारा में रंगों बापूजी ने और ब्रह्मवर्त में अजीमुल्ला खान ने प्रचंड युद्ध की रचना करने के लिए क्या-क्या मंत्रणा की, इतिहास कभी भी यह शब्दशः नहीं बता पाएगा। फिर भी सन् 1857 का युद्ध हुआ, यह जितना सत्य है-इस युद्ध की योजना लंदन में अजीमुल्ला खान और रंगो बापूजी ने बनाई थी, यह बात भी उतनी ही सत्य है। लंदन से रंगो बापूजी सीधे सतारा को लौट गए और उत्तर की ओर ब्रह्मवर्त में जिस भवन का निर्माण हो रहा था 1857 का स्वातंत्र्य समर - 78