भारतकोश
अद्भुत रामायण (पं. ज्वालाप्रसाद मिश्र हिन्दी टीका सहित)

अद्भुत रामायण (पं. ज्वालाप्रसाद मिश्र हिन्दी टीका सहित)

Adbhut Ramayana Hindi

महर्षि वाल्मीकि (टीकाकार: पं. ज्वालाप्रसाद मिश्र) द्वारा

स्रोत: Maharshi Valmiki Krit Srimad Adbhut Ramayanam with Hindi Tika by Pt. Jwala Prasad Mishra (उद्गम)

DevanagariHindipublished173 पृष्ठ

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(१४०) अद्भुतरामायण [पंचविंशति-

नंदिनी, भद्रकालिका, आदित्यवर्णा, २७० कौमारी श्रेष्ठ मोरपर चढने- वाली ॥ ५२ ॥

वृषासनगता गौरी महाकाली सुरार्चिता ।। अदितिर्नियता रौद्री पद्मगर्भा २८० विवाहना ॥ ५३ ॥ विरूपाक्षी लेलिहाना महासुरविना शिनी ॥ महाफलानवद्यांगी कामपूरा विभावरी ॥ ५४ ॥

वृषके आसनपर स्थित, गौरी, महाकाली देवताओंसे अर्चित, अदिति नियता, रौद्री, पद्मगर्भा, २८० विवाहना ॥ ५३ ॥ विरूपाक्षी, जिह्वासे होठ चाटनेवाली, महाअसुरोंकी नाश करनेवाली, कामफला, निन्दारहित अंग- वाली, कामपूरा विभावरी ॥ ५४ ॥

विचित्ररत्नमुकुटा प्रणतर्द्धिविवर्द्धिनी २९० ।। कौशिकी कर्षिणी रात्रिस्त्रिदशार्त्तिविनाशिनी ॥ ५५ ॥ विरूपा च सुरूपा च भीमा मोक्षप्रदायिनी ॥ भक्तार्त्तिनाशिनी भव्या ३०० भवभावविना-, शिनी ॥ ५६ ॥

विचित्र मुकुटवाली, भक्तोंकी ऋद्धि बढानेवाली, २९० कौशिकी कर्षिणी रात्रि, देवताओंके दुःख नाश करनेवाली ॥ ५५ ॥ विरूपा, सुरूपा, भीमा, मोक्षदाता, भक्तोंके दुःखनाशक, भव्या ३०० भवभावविनाशिनी ॥ ५६ ॥

निर्गुणा नित्यविभवा निःसारा निरपत्रपा ।। यशस्विनी सामगी- तिर्भावांगनिलयालया ॥ ५७ ॥ दीक्षा ३१० विद्याधरी दीप्ता महेंद्र- वनिपातिनी ॥ सर्वातिशायिनी विद्या सर्वशक्तिप्रदायिनी ॥ ५८ ॥

निर्गुणा, नित्यविभाववाली, निःसारा, निरपत्रपा (लज्जारहित), यश- स्विनी, सामगीति, भवांगनिलयालया ॥ ५७ ॥ दीक्षा ३१० विद्याधरी, दीप्ता, महेन्द्रनिपातिनी, सबसे अधिक विद्या, सब शक्तिकी देनेवाली ॥ ५८ ॥

सर्वेश्वरप्रिया तार्क्षी समुद्रान्तरवासिनी ॥ अकलंका निराधारा ३२० नित्यसिद्धा निरामया ॥ ५९ ॥ कामधेनुर्वेदगर्भा धीमती मोहनाशिनी ॥ निःसंकल्पा निरातंका विनया विनयप्रदा ३३० । ६०।

सर्वेश्वरकी प्रिया, तार्क्षी, समुद्रके अन्तरमें निवास करनेवाली, कलंकरहित, निराधारा, ३२० नित्यसिद्धा, निरामया, ॥ ५९ ॥ कामधेनु, वेदगर्भा, धीमती, मोहनाशिनी, निःसंकल्पा, निरातंका, विनयप्रदा ३३० ॥ ६० ॥