अध्यात्म रामायण
Adhyatma Ramayana
महर्षि वेदव्यास (टीकाकार: मुनीलाल) द्वारा
( ५ )
चित्र
छोटे, बड़े, रंगीन और सादे धार्मिक चित्र
श्रीकृष्ण, श्रीराम, श्रीविष्णु और श्रीशिवके दिव्यदर्शन ।
जिसको देखकर हमें भगवान् याद आवें, वह वस्तु हमारे लिये संग्रहणीय है । किसी भी उपायसे हमें भगवान् सदा स्मरण होते रहें तो हमारा धन्य भाग हो । भक्तों और भगवान्के स्वरूप एवं उनकी मधुर मोहिनी लीलाओंके सुन्दर दृश्य-चित्र हमारे सामने रहें तो उन्हें देखकर थोड़ी देरके लिये हमारा मन भगवत्-स्मरणमें लग जाता है और हम सांसारिक पाप-तापोंको भूल जाते हैं ।
ये सुन्दर चित्र किसी अंशमें इस उद्देश्यको पूर्ण कर सकते हैं । इनका संग्रहकर प्रेमसे जहाँ आपकी दृष्टि नित्य पड़ती हो, वहाँ घरमें, बैठकमें और मन्दिरोंमें लगाइये एवं चित्रोंके बहाने भगवान्को यादकर अपने मन-प्राणको प्रफुल्लित कीजिये । भगवान्की मोहिनी मूर्तिको ध्यान कीजिये ।
कागजका साइज १० इञ्च चौड़ा १५ इञ्च लम्बा, सुनहरी चित्रका -)॥, रंगीन चित्रका मूल्य -), दो रंगके और सादे चित्रका मूल्य )॥, यह छोटे ब्लाकोंसे ही वेल (बार्डर) लगाकर बड़े कागजोंपर छापे गये हैं
कागजोंका साइज ७॥ $\times$ १० इञ्च, सुनहरीका मूल्य -) ।, रंगीनका मूल्य )॥, सादेका )॥ मात्र ।
इनके सिवा १८$\times$२३, १५$\times$२० और २४$\times$॥ के बड़े और छोटे चित्र भी मिलते हैं ।
दुकानदार और थोक खरीदारोंको कमीशन भी दी जाती है ।
चित्रोंकी बड़ी सूची अलग मुफ्त मँगवाइये !
पता—
गीताप्रेस, गोरखपुर
"कल्याण" धार्मिक मासि[क]
( हर महीनेमें २०५०० छपता)
भक्ति, ज्ञान, वैराग्य और धर्मसम्बन्धी मासिक पत्र, पृष्ठ-संख्या ८०, मूल्य ४=), [जिस]में एक विशेषांक भी निकलता है जो आठ [आनेके] मूल्यमें मिल जाता है । अबतक ६ विशेषांक [निकल] चुके हैं ।
( डाकमहसूलसहित )
भगवन्नामांक
पृष्ठ-संख्या ११०, चित्र-संख्या ४१, मू[ल्य ...]
रामायणांक
पृष्ठ-संख्या ५००, चित्र-संख्या १६०, मू० [५]
श्रीकृष्णांक
पृष्ठ-संख्या ५२२, चित्र-संख्या १०८, मू० २ [?]
ईश्वरांक सपरिशिष्टांक
पृष्ठ-संख्या ६२४, चित्र-संख्या ३३, मू० [?]
तीसरे वर्षकी फाइल—( प्रसिद्ध श्रीभक्तांक सहित ) अनेक सुन्दर चित्र और उपादेय लेख एवं कविताओंका यह संग्रह आपकी पुस्तकोंमें स्थान पाने योग्य है । सत्संग और पठन-पाठनकी अच्छी सामग्री है । धार्मिक विचारोंका सुन्दर संग्रह और स्थायी साहित्य है । भक्तोंकी कथाएँ विशेष मनोहर हैं । पूरी १२ अंकोंकी फाइलका मूल्य केवल ४=) मात्र, डाकखर्च माफ । (भक्तांक अलग नहीं मिलता)
चौथे वर्षकी फाइल—( सुविख्यात श्रीगीतांकसहित ) लगभग २०० चित्र और १४०० पृष्ठ । मूल्य केवल ४=), डाकव्यय माफ । ( गीतांक अलग नहीं मिलता )
जब श्रीगीतांक निकला तब कल्याणकी ग्राहकसंख्या ७५०० से लगभग १३००० हो गयी थी । यह गीताके सम्बन्धमें अपने ढंगका अनोखा ग्रन्थ है । बहुत थोड़ा बचा है । पहले-दूसरे या पाँचवें-छठे वर्षकी तरह ये फाइलें भी समाप्त हो जानेपर मिलनी कठिन हैं । भेंट आदिमें देनेके लिये भी यह उत्तम सामग्री है ।
( ६ )
श्रीरामायणांक
बहुत । दूसरा संस्करण ! पुनः छप गया ! नवीन संस्करण !
की प्राप्तिके लिये अनेक प्रेमी लालायित थे वही 'रामायणांक' पुनः छप गया। केवल ५००० छपा महान् (=) ही रक्खा गया है। जिन सज्जनोंकी माँग लौटा दी गयी थी, वे अब मँगवा सकते हैं। पृष्ट भगवान् ऊपर और सैकड़ों चित्र हैं।
, मायणांकका गेटप, छपाई, सफाई, कागज और बाइंडिंग सब सुन्दर हैं।
ही दि रामायणांकमें श्रीरामजीकी लीलाओंके अनेक सुनहरी, बहुरंगे, सादे चित्र एवं अनेक पवित्र तीर्थ आपव प्रयाग, काशी, चित्रकूट, पञ्चवटी, रामेश्वर, जनकपुर, शृङ्गवेरपुर आदिके दर्शनीय चित्र हैं; रामायण-इस भारतके कई भौगोलिक मानचित्र भी हैं।
रामायणांकमें अनेक महात्माओं, देशी-विदेशी विद्वानों और रामायणप्रेमियोंके लेख हैं।
सात रामायणांक सुखमय जीवनका अमोघ साधन है।
के हि आजतक कल्याणके सिवा इतने बड़े किसी भी सामयिक पत्रको दुबारा छपकर आपकी सेवा करनेका र नहीं मिला। यदि आप इस बार इस अङ्कको न अपना सकेंगे तो समझ लीजिये कि एक उत्कृष्ट वस्तुमे वञ्चित रह जायँगे, क्योंकि इसके शीघ्र तीसरी बार छपनेकी आशा हम अभी आपको नहीं दिला सकते। खरीदनेमें शीघ्रता कर सकते हैं।
व्यवस्थापक—
"कल्याण-कार्यालय," गोरखपुर