ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)

ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)
Rigvediya Aitareya Brahmana with Hindi Translation
महिदास ऐतरेय / पं. गंगाप्रसाद उपाध्याय द्वारा
स्रोत: हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · 1950 (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished592 पृष्ठ
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१८८ [ तीसरी पञ्चिका गृह ही प्रतिष्ठा हैं। यह सूक्त प्रतिष्ठा है इसलिये बड़ी प्रतिष्ठा- युक्त वाणी से सूक्त को पढ़ना चाहिये। यदि किसी के पशु दूर- दूर चर रहे हों तो वह उनको घर लाना चाहता है। घर ही पशुओं की प्रतिष्ठा अर्थात् ठहराने की जगह है। (१३) ऐतरेय ब्राह्मण की तीसरी पञ्चिका का दूसरा अध्याय समाप्त हुआ