ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)
Rigvediya Aitareya Brahmana with Hindi Translation
महिदास ऐतरेय / पं. गंगाप्रसाद उपाध्याय द्वारा
स्रोत: हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · 1950 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंतीसरा अध्याय १५-वे ज्योतिर्गौ और आयु-स्तोम करते हैं। यह लोक ज्योति है। अन्तरिक्ष गौ है। वह लोक आयु है। पिछले तीन दिनों में वही स्तोम पढ़े जाते हैं (जो पहले तीन दिनों में)। पहले तीन दिन का क्रम है ज्योतिः, गौ, आयुः। पिछले तीन दिनों का है गौ, आयुः, ज्योतिः। (दोनों भागों के क्रम के हिसाब से) ज्योति यह लोक भी है और वह लोक भी। (अर्थात् पहले तीन दिनों में ज्योति पहला है और पिछले तीन दिनों में आखिरी)। इस प्रकार दोनों ज्योतियाँ एक दूसरे के के सामने हैं। वे षडह (छः दिन के कृत्य) को दोनों ओर से ज्योति से सम्पादन करते हैं। इस प्रकार दोनों लोकों में उनकी प्रतिष्ठा होती है, इसमें भी और उसमें भी। और वे दोनों में विचरते हैं। यह जो "अभिप्लव षडह" है यह देवों का चक्र है। दो अग्निष्टोम इसकी परिधि हैं। चार बीच के उक्थ्य नाभि हैं। इस चक्र के ज़ोर से जहाँ चाहे जा सकता है। जो इस रहस्य को समझता है वह साल को अच्छी तरह पार कर लेता है। ( २४७ )