ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)

ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)
Rigvediya Aitareya Brahmana with Hindi Translation
महिदास ऐतरेय / पं. गंगाप्रसाद उपाध्याय द्वारा
स्रोत: हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · 1950 (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished592 पृष्ठ
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पाँचवाँ अध्याय ] २७७ इसमें वृषन् शब्द आया है। यह दूसरे दिन का रूप है। जातवेद मंत्र वही है :— जातवेद से सुनवाम सो मम् । जातवेद का निविद् सूक्त यह है :— यज्ञेन वर्धत जातवेदसम्......( ऋ० २।२ ) इसमें 'वृध' है जो दूसरे दिन का रूप है। ( ४ ) ऐतरेय ब्राह्मण की चौथी पञ्चिका का पाँचवाँ अध्याय समाप्त हुआ। ऐतरेय ब्राह्मण की चौथी पञ्चिका समाप्त हुई।