ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)
Rigvediya Aitareya Brahmana with Hindi Translation
महिदास ऐतरेय / पं. गंगाप्रसाद उपाध्याय द्वारा
स्रोत: हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · 1950 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंपहला अध्याय १—( द्वादशाह ) के तीसरे दिन का देवता है विश्वेदेवा । स्तोम है सत्रहवां । साम है वैरूप । छन्द जगती । जो यह जानता है कि देवता कौन है, स्तोम कौन है, साम कौन है और छन्द कौन है उसका यज्ञ सफल हो जाता है । तृतीय दिन का रूप है "समानोदर्क"*। इसके अन्य रूप यह हैं :—अश्व, अंत, पुनरावृत्ति, पुनर्निर्नृत्ति ( अर्थात् अन्त के स्वरों में समानता ), रति या रमण करना, पर्यस्ति ( ढकना ), तीन की संख्या, 'अन्त' का रूप, पिछले पद में देवता का उल्लेख, दूसरे लोक की ओर संकेत, वैरूप साम, जगती छन्द और भूत काल की क्रिया । तीसरे दिन का आज्य शस्त्र यह है :— युक्ष्वा हि देव हूतमाँऽअश्वाँऽअग्नेरथीरिव... (ऋ० ८।७५ ) तीसरे दिन के कृत्य के द्वारा देव स्वर्ग लोक की ओर चल पड़े । असुर राक्षसों ने रोका । उन्होंने असुरों से कहा, "विरूप *उदर्क का अर्थ है समाप्ति । 'समानोदर्क' का अर्थ है समान समाप्ति वाला । अर्थात् समान वाक्य पर समाप्त होने वाले सूक्त । ( २८१ )