भारतकोश
ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)

ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)

Rigvediya Aitareya Brahmana with Hindi Translation

महिदास ऐतरेय / पं. गंगाप्रसाद उपाध्याय द्वारा

स्रोत: हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished592 पृष्ठ

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पृष्ठ 371

पहला अध्याय १—देवता गण सर्वचरु में सत्र करने बैठे । वे पाप के फल को दूर न कर सके । उनसे कद्रु का पुत्र, सर्प ऋषि, मंत्रों का कर्त्ता अर्बुद बोला, "होता से की जाने वाली एक क्रिया तुम से छूट गई । उसे मैं कर दूँ । तब तुम पाप के फल से छूट जाओगे ।" उन्होंने कहा, "अच्छा" । हर मध्य दिन के सवन में वह आया । उनके पास बैठा और पत्थरों पर सोम को निचोड़ा । उसी के अनुकरण में मध्यदिन के सवन में पत्थरों पर सोम निचोड़ते हैं, जिस मार्ग से वह आता था उसे "अर्बुदोदा सर्पणी" कहते हैं । सोम राजा ने उन देवों को मद-युक्त कर दिया । उन्होंने कहा, "विषवाला साँप हमारे राजा की ओर देखता है । उसकी आँखों से पट्टी बाँध दें," इसी के अनुकरण में अब भी पट्टी बाँध कर पत्थरों पर सोम निचोड़ते हैं । सोम राजा ने उनको मद-युक्त कर दिया । उन्होंने कहा, "यह पत्थर पर सोम निचोड़ने के समय अपने ही मंत्र पढ़ता ( ३५७ )