ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)

ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)
Rigvediya Aitareya Brahmana with Hindi Translation
महिदास ऐतरेय / पं. गंगाप्रसाद उपाध्याय द्वारा
स्रोत: हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · 1950 (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished592 पृष्ठ
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पहला अध्याय १—( राजसूय यज्ञ के ) प्रातःसवन और तृतीय सवन के स्तोत्र और शस्त्र ( सोम यज्ञ के ) ऐकाहिकों के ही समान होते हैं। क्योंकि ऐकाहिक के दोनों सवन शांत और प्रतिष्ठा-युक्त हैं और शांति और प्रतिष्ठा के देने वाले हैं। ( परन्तु मध्य सवन में भेद है ) । माध्यं दिन के पवमान का वर्णन हो चुका । जिसके पृष्ठ स्तोत्र में दोनों साम बृहत् सहित होते हैं। और दोनों साम गाये जाते हैं। रथंतर साम का पहला मंत्र यह है :— आ त्वा रथं यथोतये……(१) तुविष्म तुविक्रतो……(२) यस्य ते महिना……(३) (ऋ० ८।४६।१-३) और रथंतर का पिछला मंत्र यह है :— इदं वसो सुतमन्धः……(१) ( ४५७ )