भारतकोश
ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)

ऐतरेय ब्राह्मण (ऋग्वेद - हिन्दी अनुवाद सहित)

Rigvediya Aitareya Brahmana with Hindi Translation

महिदास ऐतरेय / पं. गंगाप्रसाद उपाध्याय द्वारा

स्रोत: हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished592 पृष्ठ

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Digitized by Arya Samaj Foundation Chennai and eGangotri ४८४ [ आठवीं पञ्चिका दशनाग सहस्राणि दत्वात्रेयो वचत्नवे । श्रान्तः परिकुटान् प्रैप्सद् दानेनांगस्य ब्राह्मणः ॥४॥ शतं तुभ्यं शतं तुभ्यमिति स्मैव प्रताम्यति । सहस्रं तुभ्यमित्युक्त्वा प्राणान्तस्म प्रतिपद्यते ॥५॥ अर्थ—प्रियमैध के लड़कों ने उदमय को जिन-जिन गायों को देने के लिये कहा, अत्रि के लड़के उदमय ने मध्यसवन में दो-दो हज़ार बड्वा ( गायों के गल्ले ) दिये ॥१॥ विरोचन के पुत्र ने ८८ हज़ार सफ़ेद घोड़ों की रस्सियाँ खोल दीं और यजमान पुरोहित को दान कर दिया ॥२॥ अत्रि के लड़के ने देश-देश से जमा की हुई दस हज़ार लड़कियों को जिनकी गर्दन में आभूषण पड़े थे दान कर दिया ॥३॥ वचत्नुक्र देश में अत्रि के लड़के ने दस हज़ार हाथी दिये। थके हुए ब्राह्मण ने अंग के दान को लेने के लिये नौकरों को कहा ॥४॥ “सौ तुझको,” “सौ तुझको” ऐसा कहता-कहता वह थक गया। तब उसने कहा “हज़ार तुझको,” “हज़ार तुझको” और फिर भी थक कर सांस लेने ठहर गया ( क्योंकि दान के लिये बहुत बाक़ी था ) ॥५॥ (८) २३—इन्द्र के इसी महाभिषेक से ममता के लड़के दीर्घतमा ने दुष्यन्त के लड़के भरत का अभिषेक किया। इससे भरत ने सब पृथ्वी की परिक्रमा की और अश्वमेध यज्ञ किया। इसके विषय में यह श्लोक हैं :- हिरण्येन परीवृतान्कृष्णान् शुक्लदतो मृगान् । मष्णारे भरतो ददाच्छतं बद्धानि सप्त च ॥१॥ CC-0.Panini Kanya Maha Vidyalaya Collection.