अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ)

अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ)
पारम्परिक लोक संग्रह द्वारा
स्रोत: अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ) · खेमराज श्रीकृष्णदास / नवल किशोर प्रेस · 1935 (उद्गम)
DevanagariHindipublished292 पृष्ठ
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( ६ ) विषय पृष्ठ संख्या ६३—बादशाह के साले को दीवान की पदवी २८९ ६४—साईं की बदनियती २६७ ९५—बीरबल को मुँह पीछे गालियाँ ३०१ ६६—अब तो आन पड़ी है ३०२ ६७—भंगी मुसलमान नहीं होते ,, ९८—अजीब तरह की पहेली ३०३ ६६—अप्सरा और पिशाचिन ३०५ १००—दादः हुजूरस्त ३०६ १०१—मित्र का मित्र से विश्वासघात ३०८ १०२—बादशाह को ठग लिया ३१३ १०३—तोर में मोर ३१९ १०४—नहिं राँचे रहिमान ३२० १०५—लड़का रो रहा था ३२१ १०६—असल का कम-असल, कम-असल का असल, बाजार का कुत्ता और गद्दी का गधा ३३५ १०७—काजी की बददयानती ३३६ १०८—आगे होकर मरवाइयेगा ३४३ १०६—ऊँट की गर्दन टेढ़ी क्यों है ३४४ ११०—अब किस पर चढ़ेंगे ”