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अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ)

अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ)

पारम्परिक लोक संग्रह द्वारा

स्रोत: अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ) · खेमराज श्रीकृष्णदास / नवल किशोर प्रेस · 1935 (उद्गम)

DevanagariHindipublished292 पृष्ठ

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६१ अकबर बीरबल विनोद न था जिस कारण इनके ऊपर ऐसी आफत आई। कुछ देर सोच समझ लेने के बाद सर्वसम्मति मिलाकर एक वृद्ध दरबारी बोला-"पृथिवीनाथ ! अधिकतर प्रिय लड़का होता है।" दरबारियों ने आपस की गोष्ठी से निश्चित किया था कि इस समय बादशाह लड़के को गोद में लिये हुए खिला रहा है अतएव उसके प्रश्न का इशारा लड़के की तरफ ही है। बादशाह उस समय वृद्ध दरबारी का उत्तर स्वीकार कर लिया और सभा बरखास्त हुई। बीरबल राजकीय कार्य से कहीं बाहर गया था दैवात दूसरे ही दिन आ पहुँचा। बादशाह को तो पहले की धुन बँधी हुई थी, बीरबल को सभा में बैठते ही वही प्रश्न उससे भी किया। वह बोला-"गरीबपरवर ! प्राणी को अपना जीव सबसे अधिक प्यारा होता है। इसकी तुलना और किसी से नहीं की जा सकती, चाहे वह अपना कितना ही सगा संबन्धी क्यों न हो ?" तब बादशाह अपने दरबारियों का मान रखने के लिये बीरबल की बात काटकर कहा-"तुम्हारा कहना गल्त है, क्या लड़का प्राण प्यारा नहीं होता ?" तुमको यदि अपने कहने पर अटल विश्वास है तो उसे प्रमाणित कर दिखावो,. बीरबल बादशाह की आज्ञा शिरोधार्य करता हुआ बोला- "पृथिवीनाथ ! बागका एक बड़ा हौज खाली करनेकी बागवान को आज्ञा दी जावे तब तक मैं बाजार से परीक्षा की चीजें लेकर लौट आता हूँ। आप सभासदों सहित बाग में उपस्थित रहें, वहीं पर मैं इस बात को प्रमाणित कर के दिखलाऊँगा। बादशाह की आज्ञा पाकर बागवान ने प्राणपण से परिश्रम