अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ)
पारम्परिक लोक संग्रह द्वारा
स्रोत: अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ) · खेमराज श्रीकृष्णदास / नवल किशोर प्रेस · 1935 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें१८६ अकबर बीरबल विनोद तत्काल बादशाहको महल से निकाल लाने का उपाय करो।” गंग बोला-“मैं दीवान बीरबल और राजा टोडरमल प्रभृत सभी दरबारियों से आग्रह पूर्वक निवेदन करता हूँ कि इस समय मेरा दिल और दिमाग काम नहीं करता है अतएव इस समय यश प्राप्ति के लिये कोई दूसरा दरबारी बीड़ा उठावे। मेरी सम्मति में तो ऐसा आता है कि बीरबल मानसिंह टोडर मल और खानखाना, प्रभृत कोई भी दरबारी इस काम का भार अपने सिर ले तो अति उत्तम हो।” राजा टोडरमल बड़ी चिन्ता में पड़ गये उन्होंने विचार किया कि जिस बात को हम लोग घंटों परिश्रम कर इतने ऊँचे पहुँचाया था वह थोड़े ही में गिरना चाहती है यदि सचमुच में गिर ही गई तो यह आज की सभा निष्फल हो जायगी। उन्होंने कहा-“जो काम जिसके करने का है वही उसके करने का असली हकदार है। कविवर ! यह काम कवियों का है; इसे कोई दूसरा नहीं कर सकता।” गंग कबि इस बार बिल्कुल निरुत्तर होगया असल में बात भी सही थी, सही के आगे हरएक विचार- वान पुरुष को झुकना पड़ता है। उसने हामी भर ली और बोला-“चाहे जैसे भी हो अब बादशाह को जनाने महल से बाहर निकाल कर ही दम लूँगा।” समस्त दरबारी आनन्दविह्वल हो गये। इस खुशखबरी के उपलक्ष में सभों ने ईश्वर पूजा करने की मनौती मानी। इसके पश्चात सभा का काम बन्द हुआ। लोग दूसरे कार्यों का सँभाल करने लगे। उधर गंगकी और ही हालत थी। उसने विचार किया कि