भारतकोश
अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ)

अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ)

पारम्परिक लोक संग्रह द्वारा

स्रोत: अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ) · खेमराज श्रीकृष्णदास / नवल किशोर प्रेस · 1935 (उद्गम)

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( ४ ) विषय पृष्ठ संख्या ५५—काली ही न्यामत है १७१ ५६—और क्या कढ़ी १७२ ५७—माला दे १७४ ५८—भाग्य बड़ी है कि उद्योग १७५ ५६—बादशाह और कवि गंग १८० ६०—सब से प्यारी बस्तु १८६ ६१—दीवान और काना नाई १९६ ६२—सौ गायों के एकमात्र अधिपति आप हो हैं २१४ ६३—गरीब लड़की वेश्या के घर २१५ ६४—महाकाली के ठट्ठे २२० ६५—हम दोनों एक साथ आवेंगे २२१ ६६—सुनार के हथफोड़े २२४ ६७—व्यसनी की लत २२७ ६८—लोहा और पारश का स्पर्श २३० ६६—तुम बड़े गदहे हो २३२ ७०—दीपक तले अँधेरा २३३ ७१—बादशाह के चार प्रश्न २३४ ७२—शाही रामायण २३७ ७३—केवल लोटा न था २३८