अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ)
पारम्परिक लोक संग्रह द्वारा
स्रोत: अकबर-बीरबल विनोद (न्याय, चातुर्य एवं हास्य कथाएँ) · खेमराज श्रीकृष्णदास / नवल किशोर प्रेस · 1935 (उद्गम)
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खूब सोच समझ कर उत्तर दो, दोनों बातों में किसे मंजूर करते हो और किसे नामंजूर ? मारवाड़ी गरदन नीची करके बोला-“दीवान जी ! मुझे कुछ भी नहीं चाहिये ।” बीरबल ने कहा-“जो तू अब कुछ भी नहीं लेना चाहता तो तुझे पहले की राजाज्ञा न मानने के अपराध में सात लाख रुपये दण्ड देने पड़ेंगे, और दूसरा अपराध यह है कि तू ने दीनदयाल को कष्ट पहुँचाने की नीयत से उसके शरीर का मांस काट लेने की शर्त करायी थी, इस कारण चार साल की सजा और भुगतनी पड़ेगी ।” मारवाड़ी का होश ठिकाने न रहा। राजदूत बीरबल की आज्ञा से उसे पकड़ लिये और वह उसी क्षण जेलखाने में बन्द कर दिया गया । मार- वाड़ी के घर वालों से सात लाख रुपये वसूल किये गये । बीरबल के इस न्याय को सुनकर बादशाह बहुत प्रसन्न हुआ और बीरबल के बुद्धि की प्रशंसा की । चूंकि दीनदयाल नेकनीयती कर पहले ही उसके पास रुपये भेज दिये था, इसलिये उसकी दूकान की प्रतिष्ठा रखने के लिये बादशाह ने उसको पारितोषिक देकर विदा किया। जो रुपये मारवाड़ी से दंड में लिये गये थे वह बीरबल को मिले ।
न स्त्री हैं न पुरुष
एक दिन बादशाह और उसके खोजे से आपस में कुछ बातें हो रही थीं, इसी बीच बीरबल की बात आई। तब