आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंमाड़ोका युद्ध । ६७ ४६ डाटिकै बोल्यो फिरि करियासों ठाकुर खबरदार है जाय ७२ सोवत मारे देशराज को औ फिरि बच्छराजको जाय ॥ जागत मारों जो करिया ना तौ ना कहे उदयसिंहराय ७३ सुनिकै बातें ये ऊदन की करिया खैंचि लीन तलवार ॥ ऐंचिकै मारा उदयसिंह को रोंका तुरत ढाल पर वार ७४ बचा दुलरुआ ग्यावलिवाला आला उदयसिंह सरदार ॥ करिया बोला फिरि ऊदन ते ठाकुर बेंदुल के असवार ७५ अबती आवै जो हौदा पर तौ यमपुरी देउँ दिखराय ॥ सुनिकै बातें ये करिया की करिया जौन उदयसिंहराय ७६ ऐँड़ा मसका रसबेंदुल का हौदा उपर पहुंचा जाय ॥ खैंचि सिरोही को कम्मर ते मारा तुरत बनाफरराय ७७ धरी सिरोही गज शुण्डा में खण्डा तुरत भई त्यहिंघाय ॥ खण्डा शुण्डा हाथी दीख्यो करिया गयो सनाकाखाय ७८ कोतल हाथी पचशब्दा था तापर तुरत भयो असवार ॥ औ यह बोल्यो फिरि हाथी ते हाथी साथी अहिउ हमार ७६ निमक हमारो बहु खायो है बांधे रहे हमारे द्वार ॥ हम जो बांधें बघऊदन को हमरे निमक होउ उद्धार ८० कहिकै बातें ये हाथी सों गरुई हाँक कीन ललकार ॥ बार तीसरी जो तू आवै ठाकुर बेंदुल के असवार ८१ कुशल न जावै तू हौदा ते खुपड़ी टँगै बरगदे डार ॥ सुनिकै बातें ये करिया की ठाकुर मोहबे का सरदार ८२ डाटिकै बोला फिरि करिया सों का तू बकै बकै जस बाल ॥ कोल्हू पिरावों मैं जम्बा को माड़ो खोदि करावों ताल ८३ मूड़ काटिकै करिया तेरो मल्हना महल देउँ पहुंचाय ॥