भारतकोश
आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

पृष्ठ 104, कुल 618 में से

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माड़ोका युद्ध । ६६ ५१ खैंचि सिरोही ली कम्मर से औ मलखे पर दई चलाय ९४ वार बचायो मलखाने ने करिया निकट पहूँच्यो जाय ॥ ढालकि औझरि मलखे मारा तब गिरपरा करिङ्गाराय ९५ घोड़ा पपीहा मलखे लीन्ह्यो औ क्षत्रिनते कह्यो सुनाय ॥ मारो मारो ओ रजपूतो तौ मिलिजाय बापका दायँ ९६ सुनिकै बातें मलखाने की ज्वानन खूब कीन घमसान ॥ रङ्गा बङ्गा शहाबाद के साथ म आये जौन पठान ६७ ते दउ मारैं दिशि करिया के रणमाँ बड़े लड़ैया ज्वान ॥ तिनके मुर्च्चा पर देवा रहे ठाकुर मैनपुरी चौहान ९८ सो- ललकारै तहँ रंगा को औ बंगाको दियो हटाय ॥ को गति बरणै तहँ देवा कै हमरे बूत कही ना जाय ६६ बड़ा लड़ैया रंगा रंगी जंगी खैंचि लीन तलवार ॥ ऐंचिकै मारा सो देवा को देवा लीन ढालपर वार १०० औ ललकारा फिरि रंगा को रंगा खबरदार ह्वैजाय ॥ खैंचि सिरोही देवा मारा रंगा गिरा भरहराखाय १०१ रंगा मरिगा जब मुर्च्चा पर बंगा चला तड़ाका धाय ॥ नंगी लीन्हें तलवारी को देवा पास पहूँचा आय १०२ सँभरिकै बैठो अब घोड़ापर तुम्हरो काल गयो नियराय ॥ यह कहि मारा तलवारी को बखतर काटि पार ह्वै जाय १०३ बचा दुलरूवा भीषमवाला ज्यहिका राखिलीन भगवान ॥ खैंचि सिरोही ली कम्मर ते औ हनिदियो बंगपरज्वान १०४ बंगा जूझा रणखेतन में तब जरिमरा करिङ्गाराय ॥ औ ललकारा रजपूतन को हमरे सुनो सिपाहिउ भाय १०५ जाय न पावैं मुहुबे वाले इनकी कटा लेउ करवाय ॥

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