आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें५६ आल्हखण्ड । १०४ करो तिलाञ्जलि तिनपुत्रनको तुम्हरे हाथ होयँ उद्धार ८ इतना कहते भइ माहिल के रूपना अटा बराबरि आय ॥ मूड देखिकै त्यहि करिया का राजा गिरा पछाराखाय ६ हाथ जोरिकै रूपना बोला ओ महरजा रजापरिमाल ॥ मूड लयआये हम करिया को माड़ो कुशल तुम्हारे बाल १० जैसे पियासा जलको पावै सूखत परै धान में वारि ॥ रूपना बारी की बातें सुनि तैसे खुशीभये नर नारि ११ हल्ला सुनिकै नर नारिन सों मल्हना रूपना लीन बुलाय ॥ विदा मांगिकै माहिल चलिभे उरई तुरत पहुँचे जाय १२ मल्हना पूंछे तब रूपना ते बेटन हाल देउ बतलाय ॥ बदी सुनायो सब लड़िकनकै माहिल जौन हमारो भाय १३ सुनिकै बातें ये मल्हना की रूपना बोला शीशनवाय ॥ बेटा अनूपी टोंडर सूरज करिया सहित चारिहू भाय १४ चारो लड़का नृपजम्बा के बबुरीबन माँ गये नशाय ॥ खबरि तुम्हारी म्वहिं लेबे को पठयो वेगि उदयसिंहराय १५ हम चलि जावैं अब बबुरीबन हमको हुकुमदेव फर्माय ॥ कुशल तुम्हारी बिनपायेते ब्याकुल रहें चारिहू भाय १६ सुनिकै बातें ये रूपना की मल्हना हुकुम दीन फर्माय ॥ करो बियारी तुम महलन में माड़ो फेरि पहुँचो जाय १७ सुनिकै बातें ये मल्हना की रूपना जेयँ लीन ज्यँवनार ॥ सजा बछेड़ा तहँ ठाढ़ो थो रूपना फाँदि भयो असवार १८ सत्रहदिनकै मैजलि करिकै माड़ो फेरि पहुँचा जाय ॥ कही खबरिया सबमोहबेकी जहँ पर बैठ बनाफ़रराय १६ पाँचो मिलिकै सम्मत कीन्ह्यो यह फिरि ठीकलीन ठहराय ॥