आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंब्रह्माका विवाह । २२५ २६' ऐसी बातें जो फिरि बोलै तौ मुहँ धाँसिदेउँ तलवार १६५ बातैं सुनिकै कमलापति की भैने जौनु चँदेले क्यार ॥ ऐँड़ लगायो हरनागर के हाथी उपर गयो सरदार १६६ भाला मार्यो कमलापति के तोंदी परा घाव सो जाय ॥ द्वार जूझिगा कमलापति जब रहिमतसहिमतचलेरिसाय१६७ ऊदन बोले तब देवा ते ठाकुर मैनपुरी चौहान ॥ देखो आवत दुइ लड़ने को उतसों समर भूमिमें ज्वान १६८ मन्नागूजर को सँग लै कै मारो समर भूमि मैदान ॥ तुम्हरी दूनन की बरणी है मानो कही बीर चौहान १६६ सुनिकै बातें बघऊदन की दोऊ बढ़े अगाड़ी ज्वान ॥ रहिमत सहिमतको ललकार्यो होवो खड़े समर मैदान १७० सुनिकै बातें इन दोउन की उनहुन खैंचि लीन तलवार ॥ उसरिन उसरिन दोऊ मारैं दोऊ लेयँ ढालपर वार १७१ बड़ी लड़ाई भै द्वारेपर औ बहि चली रक्तकी धार ॥ रहिमत सहिमत जिन्सीवाले घायल भये द्वऊ सरदार १७२ सुमिरि भवानी महिरवाली मनियादेव मोहेबे क्यार ॥ घोड़ बढ़ायो बघऊदन ने दोऊ कलशा लिये उतार १७३ देखि वीरता बघऊदन की भा मन खुशी पिथौराराय ॥ हँसिकै बोल्यो बघऊदन ते मानो कही बनाफरराय १७४ उलटी रीती हमरे घरकी ऐसो सदा क्यार व्यवहार ॥ हो समधवारो जब द्वारेपर तबफिरिभौरिनकाव्यवहार१७५ अब तुम लावो परिमालिक को यहहू नेग यहाँ द्वैजाय ॥ होय तयारी फिरि भौरिनकै साँचे हाल दीन बतलाय १७६ इतना सुनिकै ऊदन चलिभो पहुँचा जहाँ रजापरिमाल ॥ १५