आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
DevanagariHindipublished618 पृष्ठ
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४२ आल्हखण्ड । २३= मालिक ललिते के तबलौंतुम यशसों रहौ सदाभरपूर ११६ माथ नवावों शिवशंकर को यहँसों करों तरंग को अन्त ॥ राम रमा मिलि दर्शन देयो इच्छा यही मोरि भगवन्त ११७ इति श्रीलखनऊ निवासि (सी, आई, ई) मुंशी नवलकिशोरात्मज बाबू प्रयाग नारायणजी की आज्ञानुसार उन्नामप्रदेशान्तर्गत पँड़रीकलां निवासि मिश्रवंशोद्भवबुध कृपाशङ्करसूनु पण्डितललिताप्रसादकृत ब्रह्मापाणिग्रहणवर्णनोनाम तृतीयस्तरंगः ॥ ३ ॥ ब्रह्मा औ बेला का विवाह सम्पूर्ण ॥ इति ॥