भारतकोश
आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

पृष्ठ 318, कुल 618 में से

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पृष्ठ 318

चन्द्रावलि की चौथि। ३१५ ५३ आशिर्वाद देउँ मुन्शीसुत जीवौ प्रागनारायणभाय २०० रहै समुन्दर में जबलों जल जबलों रहैं चंद औ सूर ॥ मालिक ललिते के तवलों तुम यशसों रहौ सदा भरपूर २०१ माथ नवावों पितु अपने को मन में रामचन्द्र को ध्याय ॥ तुम्ही खेवैया हौ नैयाके ओ रघुरैया होउ सहाय २०२ माघ कृष्ण तिथि श्रीगणेशकी ताते वार वार पदध्याय ॥ सम्बत वनइस सै पचपन में पूरों भयो आज अध्याय २०३ इति श्रीलखनऊनिवासि (सी,आई,ई) मुंशीनवलकिशोरात्मजबाबू प्रयागनारायण जीकी आज्ञानुसार उन्नामप्रदेशान्तर्गत पँड़रीकलानिवासि मिश्रवंशोद्भवबुध कृपाशङ्करसूनु पण्डितललिताप्रसादकृत चन्द्रावलिचौथिपूर्णवर्णनंनाम द्वितीयस्तरंगः ॥ २ ॥ चन्द्रावलि की चौथि सम्पूर्ण ॥ ॥ इति ॥

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