भारतकोश
आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

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आल्हानिकासी । ३५७ ५ मैं हनिडारों तलवारी सों साँची सुनो चँदेलेराय ३४ सुनिकै बातें बघऊदन की जरि बरि गये रजापरिमल ॥ दशहरि पुरवाको खाली करु बेटा देशराज के लाल ३५ गऊ रक्त सम जल तू जानै भोजन गऊ माँस अनुमान ॥ करै मेहरिया कै संगति जो होवै बहिनी संग समान ३६ होउ पातकी तुम कलियुग में जो नहिं करो बचन परमान ॥ इतना सुनिकै आल्हा ऊदन तुरतै चले वहाँ ते ज्वान ३७ अपने अपने फिरि घोड़नपर दूनों भाय भये असवार ॥ तुरतै रूपन को बुलवायो बोले उदयसिंह सरदार ३८ बा हजार जो हमरी फौजैं तिनमाँ खबरि सुनायोजाय ॥ करैं तयारी सब नर नाहर अबहीं कूच देयँ करवाय ३६ इतना सुनिकै रुपना चलिभा सबका खबरि सुनाई जाय ॥ इक हरकारा को पठवायो औ देवा को लीन बुलाय ४० हाल बतायो आल्हा ठाकुर जो कछु कह्यो चँदेलेराय ॥ इतना सुनिकै देवा बोला दादा साँच देयँ बतलाय ४१ हमहूं रहिबे ना मोहबे मा साथै चलैं तुम्हारे भाय ॥ सवन चिरैया ना घर छोड़ै ना बनिजरावनिजकोजाय ४२ यह नहिं चहिये परिमालिकको ऐसे समय निकोरैंभाय ॥ लिखी गोसइयाँ की को मेटै साथै चलब बनाफरराय ४३ कौन देशमें अब चलि बसिहौ हमको साँच देउ बतलाय ॥ सुनिकै बातें ये देवाकी बोले तुरत बनाफरराय ४४ बैरी हमरे सब राजा हैं जावैं कौन देशकोभाय ॥ तुमहूँ ऊदन सम्मत करिकै ठीहा ठीक देउ ठहराय ४५ इतना सुनिकै ऊदन बोले दादा साँच देयँ बतलाय ॥