भारतकोश
आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

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कीरतिसागरका मैदान । ४३५ ११ योग दिखावब हम सागर पर खेतम लड़ब बरोबरि आय ॥ देखि सनीनो हम मोहबे का पाछे धरब अगाड़ी पायँ १०५ पंद्रादिन लौं रहि मोहवे मा तुम्हरी परब देब करवाय ॥ नहिं मुख देखें हम पिरथी का गड़बड़ तहाँ मचावैं आय १०६ अड़वड़ योगी हमरे सँग मा लड़बड़ गड़बड़ देयँ हटाय ॥ बड़बड़ राजनकी गिनती ना सड़वड़ करें हमारी आय १०७ काह हकीकति है पिरथी कै जो तहँ चेंय करें मुख माय ॥ मान न रैहैं तहँ काहू के योगी योग देयँ दिखलाय १०८ काल्हि सबेरे तुम सागर मा पवनी करो अपनी जाय ॥ दूत पठावो तुम झाबर का योगी फौज देयँ दिखलाय १०६ मारि गिरावैं हम भोगिन का माता साँच दीन बतलाय ॥ भयो आसरा तब मल्हना के योगी चलिभे शीश नवाय ११० सुनी बतकही यह माहिल जब टाहिल चुगुलन मा सरदार ॥ चला उताइल सो सागर को राजा पिरथी के दरबार १११ बड़ी खातिरी करि माहिल कै राजा पास लीन बैठाय ॥ कही हकीकति तहँ योगिन कै माहिल बार बार सब गाय ११२ योगी आये अनगिनती हैं झाबर डेरा दिह्यनि डराय ॥ शपथ खायकै ते मल्हना ते अबहीं गये पिथौराराय ११३ मारि गिरावब हम सागर मा गड़बड़ जौन मचाई आय ॥ काह हकीकति पृथ्वीराज कै आपनयोग देब दिखलाय ११४ साँचे योगी सो अड़बड़ हैं हमहूँ देखि गयेन सकुचाय ॥ पहिले खेदो तुम योगिनका पाछे मोहबा लेउ लुटाय ११५ काह हकीकति है योगिन कै सरबीर करें नृपति कै आय ॥ चौंड़ा धांधू को पठवावो योगी कूच देयँ करवाय ११६