भारतकोश
आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

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आल्हाकामनावन । ४७१ ६ कहाँ बनाफर आल्हाठाकुर हमका पता देउ बतलाय ॥ सुनिकै बातैं जगनायककी बोला एक मसखरा भाय ८३ आल्हा ऊदन मोहबे वाले मरिगे समर भूमि मैदान ॥ काह बतावैं परदेशी से तिनकीकुशलनहींहैज्वान ८४ आल्हा तेली इक कनउज मा दूसर नगर आल्ह कुतवाल ॥ सुनी मसखरा की बातैं जब जगनिकद्वैगाहाल बिहाल८५ तबलों ढाढ़ी इक बोलत भा ठाकुर घोड़े के असवार ॥ आल्हा ऊदन मोहबेवाले नीके दऊ भाय सरदार ८६ अबहीं आवत हम ड्योढ़ीते ठाकुर घोड़े के असवार ॥ खड़ा धौरहर वहु ऊदन का झलकैकलश सूबरणक्यार८७ सुनिकै बातैं त्यहि ढाढ़ी की जगनिक दीन दुकान लुटाय ॥ हाट बांट में हल्ला हैगा पहुँचे राजसभा वहु जाय ८८ सुनिकै बातैं हलवाइन की लाखनि राना लीन बुलाय ॥ पकरिकै लावो त्यहि ठाकुर को हमरी नजरि गुजारो आय ८९ इतना सुनिकै लाखनि राना भूरी उपर भये असवार ॥ मीरासय्यद को सँग लैकै आये बेगि हाट त्यहिवार ६० सय्यद दीख्यो जगनायक को तब लाखनिते कह्यो हवाल ॥ यहु है भैनो महराजा को जयहिकानाम रजापरिमाल ६१ इतना सुनिकै लाखनिराना अपनो हाथी लीन घुमाय ॥ मीरासय्यद जगनायक ते भेंटे तुरत तहाँ पर आय ६२ जहाँ धौरहर बघऊदन का दोऊ तहाँ गये असवार ॥ द्वारे ठाढ़े उदयसिंह थे भेंटे तुरत आय सरदार ६३ हाथ पकरिकै जगनायक को महलन तुरत पहुँचे जाय ॥ आल्हा दीख्यो जगनायक को अपने पास लीन बैठाय ६४